उत्तर प्रदेश: मदर ओरिएंटेशन कार्यक्रम को मिल रही गति, अब हर मां बनेगी बच्चों की पहली शिक्षक

लखनऊ। प्रदेश में बालवाटिका शिक्षा को परिवार की सहभागिता के साथ मजबूत करने के लिए ‘मदर ओरिएंटेशन’ कार्यक्रम को गति मिली है। मंगलवार को इसका राज्यव्यापी ऑनलाइन आयोजन हुआ, जिसमें नोडल एसआरजी, शिक्षक संकुल, प्रधानाध्यापक, बालवाटिका नोडल शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और बाल विकास विभाग की सुपरवाइजरों ने भाग लिया।

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि बच्चे सीखना वहीं से शुरू करते हैं, जहां मां बोलना शुरू करती है, इसलिए बालवाटिका शिक्षा में मातृभूमिका को केंद्र में रखा जा रहा है। जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रत्येक माह यह कार्यक्रम आयोजित होगा।

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उन्होंने बताया कि परिवार की सक्रिय भागीदारी से 3-6 वर्ष के बच्चों में भाषा-विकास, पोषण, व्यवहारिक आदतों और घर आधारित गतिविधियों को सुदृढ़ किया जा रहा है। इससे बच्चों को स्कूल-रेडी बनाने और सीखने की असमानताओं को कम करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में मातृभाषा में संवाद, कहानी-कथन, बातचीत और खेल-आधारित गतिविधियों के महत्व पर भी चर्चा की गई। कहा गया कि बच्चों के साथ बिताया गया गुणवत्तापूर्ण समय उनकी सीख की सबसे सशक्त नींव बनाता है।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा 

“मदर ओरिएंटेशन कार्यक्रम प्री-प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता को परिवार की सहभागिता से जोड़ने का अत्यंत प्रभावी माध्यम है। यह पहल अभिभावक-विद्यालय साझेदारी को नई मजबूती देगी।”

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