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कैसे करोड़ों भारतीयों के सुरक्षा कवच बन गए मोदी! — डॉ. अतुल मलिकराम
यदि भारतीय राजनीति के मौजूदा दौर को किसी एक शब्द में परिभाषित किया जाए, तो वह शब्द होगा— मोदी मैजिक। यह केवल किसी नेता की लोकप्रियता का संकेत नहीं है, बल्कि उस गहरे भावनात्मक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है, जो बीते एक दशक में भारतीय मतदाता के भीतर घटित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीति, नेतृत्व और जनता के रिश्ते को जिस तरह पुनर्परिभाषित किया है, उसने भारतीय लोकतंत्र के व्यवहार को एक नई दिशा दी है।
नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा असाधारण है। चाय बेचने वाले से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कथा है। यही कहानी करोड़ों गरीब, निम्न-मध्यम वर्गीय और ग्रामीण परिवारों के दिलों को छूती है। उन्हें लगता है कि मोदी उन्हीं में से एक हैं। यही भावनात्मक जुड़ाव मोदी को अन्य नेताओं से अलग करता है। उन्होंने खुद को सत्ता से नहीं, बल्कि सेवा से जुड़े नेता के रूप में स्थापित किया है। उनका सादा जीवन, अथक कार्यशैली और अनुशासित दिनचर्या उन्हें एक त्यागी और समर्पित नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत करती है—जो उस आम नागरिक को आकर्षित करती है, जिसने वर्षों तक राजनीति को भ्रष्टाचार और विलासिता से जुड़ा देखा है।
इस भावनात्मक संबंध को मोदी ने निरंतर संवाद के माध्यम से और मजबूत किया। मन की बात जैसे कार्यक्रमों ने प्रधानमंत्री पद को दूर की सत्ता से निकालकर आम नागरिक के घर की बैठक तक पहुंचा दिया। रेडियो के माध्यम से लोग उनकी आवाज सुनते हैं, अपने जैसे लोगों की कहानियां सुनते हैं और महसूस करते हैं कि देश का नेतृत्व उनकी दुनिया को समझता है। सोशल मीडिया ने इस जुड़ाव को और गहराई दी है। मोदी आज भारत के सबसे डिजिटल रूप से सक्रिय राजनेता हैं, जो ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपने मोबाइल ऐप के जरिए रोज़ करोड़ों लोगों से सीधे संवाद करते हैं।
यह केवल प्रचार नहीं, बल्कि एक गहरा मनोवैज्ञानिक जुड़ाव है। जब कोई नेता लगातार आपकी दुनिया में मौजूद रहता है, आपकी भाषा में बात करता है, तो वह आपके जीवन का हिस्सा बन जाता है। मोदी इस मनोविज्ञान को बखूबी समझते हैं। मोदी मैजिक का एक और मजबूत आधार तकनीक और डेटा का प्रभावी उपयोग है। 2014 के बाद भारतीय राजनीति में डिजिटल राजनीति का उदय हुआ। भाजपा ने डेटा के जरिए लोगों की जरूरतों, सोच और प्राथमिकताओं को समझा और उसी के अनुरूप संदेश गढ़े। युवाओं से रोजगार और स्टार्टअप की बात की गई, किसानों से सम्मान निधि और फसल बीमा की, महिलाओं से उज्ज्वला योजना और शौचालय निर्माण की। हर वर्ग को यह एहसास हुआ कि सरकार सीधे उससे संवाद कर रही है।
व्हाट्सएप जैसे माध्यमों ने इन संदेशों को गांव-गांव तक पहुंचा दिया। पारंपरिक मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय, भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के नेटवर्क को ही एक विशाल संचार तंत्र में बदल दिया। इससे मोदी का संदेश बिना बाधा और बिना विकृति के सीधे जनता तक पहुंचा।
मोदी मैजिक का एक महत्वपूर्ण स्तंभ राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक पहचान है। मोदी ने भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपराओं और इतिहास को आत्मसम्मान का विषय बनाया। राम मंदिर का निर्माण केवल धार्मिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय गौरव और ऐतिहासिक न्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया। सेना की कार्रवाइयों और सीमा पर लिए गए कड़े फैसलों को मजबूत भारत की पहचान के तौर पर उभारा गया। इससे जनता को यह भरोसा मिला कि देश अब कमजोर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से भरा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मोदी की सक्रियता ने भारत की वैश्विक छवि को और सशक्त किया है।
इन सबके पीछे एक मजबूत संगठनात्मक शक्ति भी कार्यरत है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन गांव से लेकर महानगर तक फैले हुए हैं। पार्टी में नेतृत्व की स्पष्टता और अनुशासन है, जिससे संदेश और रणनीति में भ्रम नहीं होता। मोदी की राजनीति ने विपक्ष को भी एक नए ढंग से परिभाषित किया है। उन्होंने खुद को ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है जो देश को हर खतरे से सुरक्षित रख सकता है। ऐसे में उनकी आलोचना कई बार जनता की नजर में देश विरोध के रूप में देखी जाने लगती है।
वास्तविकता यह है कि आज भारतीय राजनीति मोदी के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। चुनाव अब केवल दलों के बीच मुकाबला नहीं रह गए हैं, बल्कि मोदी बनाम बाकी सब के रूप में देखे जाते हैं। मोदी ने राजनीति को एक भावनात्मक अनुभव में बदल दिया है, जहां नेता सिर्फ शासन नहीं करता, बल्कि लोगों की आकांक्षाओं, सपनों और विश्वास का प्रतिनिधि बन जाता है। जब तक यह भावनात्मक जुड़ाव, राष्ट्रीय गर्व और निरंतर संवाद कायम रहेगा, तब तक मोदी मैजिक भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली शक्ति बना रहेगा।
