सनबीम स्कूल बलिया में ‘अंतर्यात्रा’ सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन, इतिहास और साहित्य से रूबरू हुए विद्यार्थी

बलिया : वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है। इसी सोच को साकार करते हुए सनबीम स्कूल, बलिया अपने विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। विद्यालय द्वारा शैक्षणिक विकास के साथ-साथ रचनात्मक, तकनीकी और नेतृत्व क्षमताओं के विकास के लिए निरंतर विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में रविवार को विद्यालय के ‘जोश ग्राउंड’ में एक विशेष सांस्कृतिक संध्या ‘अंतर्यात्रा’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित दर्शकों ने इतिहास के झरोखों और साहित्य की गहराई का जीवंत अनुभव किया।

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सुप्रसिद्ध रंगकर्मी प्रणब मुखर्जी के निर्देशन और परिकल्पना में तैयार इस नाट्य प्रस्तुति ने इतिहास के चार खंडों को ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता केदारनाथ सिंह की कविताओं के साथ बेहद खूबसूरती से पिरोया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किताबी ज्ञान को क्रियात्मक गतिविधियों और केदारनाथ सिंह जैसे महान साहित्यकारों के साहित्य से जोड़ना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह (पूर्व कुलपति, जे.पी. विश्वविद्यालय, बिहार एवं पूर्व संकाय अध्यक्ष, शिक्षा संकाय, बीएचयू) तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर (प्रसिद्ध कवि और गीतकार, ‘बलिया के लाल’) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

विद्यालय के निदेशक डॉ. कुंवर अरुण सिंह और सचिव श्रीवत्स सिंह ने मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया, जबकि प्रधानाचार्या डॉ. अर्पिता सिंह ने विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर का अभिनंदन किया।

नाट्य प्रस्तुति ‘अंतर्यात्रा’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विद्यालय के बाल कलाकारों ने केदारनाथ सिंह की कविताओं के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों को मंच पर जीवंत कर दिया। प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभाव ने प्रस्तुति को और भी प्रभावशाली बना दिया।

मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों में सांस्कृतिक चेतना और कला के प्रति प्रेम जागृत करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को स्वाध्याय के लिए प्रेरित करते हुए कई महत्वपूर्ण पुस्तकों के अध्ययन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का पठन व्यक्तित्व निर्माण के लिए अनिवार्य है।

अपने संबोधन में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता, गायत्री मंत्र और श्री दुर्गा सप्तशती के श्लोकों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को साझा किया और विद्यार्थियों को इन आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सागर ने अपने जीवन संघर्षों और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई के ग्लैमर और बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था, लेकिन दृढ़ निश्चय से हर लक्ष्य संभव है।

उन्होंने महान साहित्यकार केदारनाथ सिंह के साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा कि उनकी कविताएँ और विचार ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें और संघर्षों को सफलता की सीढ़ी बनाएं।

कार्यक्रम में नगर के अनेक शिक्षाविदों और गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पं. राजकुमार मिश्रा, पवन तिवारी, डॉ. फतेहचंद बेचैन, श्वेता पांडेय मिश्रा, सुशीला पाल, शिव कुमार सिंह कौशिकेय, श्वेतांक सिंह तथा कुंवर सिंह डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. मंजीत सिंह सहित कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।

इस दौरान रमेश चंद्र द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। अंत में हेडमिस्ट्रेस श्रीमती नीतू पांडे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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