एलपीजी संकट के पीछे वैश्विक हालात भी जिम्मेदार : डॉ. अतुल मलिकराम

नई दिल्ली/लखनऊ: देश के कई शहरों में एलपीजी सिलेंडर को लेकर गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें और आपूर्ति में देरी की खबरों के बीच राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने कहा है कि मौजूदा स्थिति को केवल स्थानीय समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा बाजार से भी जुड़ा मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हुआ, जो दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इसके कारण कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना है।

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डॉ. मलिकराम ने कहा कि भारत एलपीजी का बड़ा उपभोक्ता है और देश की कुल जरूरत का एक हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित होती है तो उसका असर देश के भीतर वितरण व्यवस्था पर भी दिखाई देता है। इसी वजह से कई शहरों में गैस एजेंसियों पर भीड़ बढ़ी और सिलेंडर मिलने में देरी की स्थिति बनी।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराना है। देश में लगभग 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं और प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी घर की रसोई बंद न हो। इसी कारण कई स्थानों पर व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति अस्थायी रूप से कम कर घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

डॉ. मलिकराम के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और वैकल्पिक देशों से आयात बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति स्थिति सामान्य होने की संभावना है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संकट के दौरान अफवाहें और जमाखोरी समस्या को और बढ़ा देती हैं। इसलिए लोगों को घबराकर जरूरत से अधिक सिलेंडर खरीदने से बचना चाहिए और प्रशासन को कालाबाजारी पर सख्ती से नजर रखनी चाहिए।

डॉ. मलिकराम ने कहा कि यह स्थिति भारत के लिए एक सबक भी है कि ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक स्रोतों को तेजी से बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि भविष्य में वैश्विक संकटों का असर कम किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और समाज के सहयोग से यह स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी।

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