विश्व नवकार दिवस पर नवकार महामंत्र को जीवन में उतारने का आह्वान

मोहनखेड़ा तीर्थ। विश्व नवकार दिवस के अवसर पर मुनि श्री पीयूष चंद्र विजय जी ने बुधवार को कहा कि नवकार महामंत्र केवल जैन धर्म की अमूल्य धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण, आत्मशुद्धि और वैश्विक शांति का शाश्वत मार्ग है।

उन्होंने कहा कि आज विश्व अशांति, वैचारिक मतभेद और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में नवकार महामंत्र आत्मा को विकारों से बचाकर उसे परमात्मा बनने की दिशा देता है। यह एक ऐसा आध्यात्मिक सुरक्षा कवच है, जो मनुष्य को आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

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मुनि श्री ने कहा कि नवकार मंत्र की विशेषता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि गुणों की वंदना की गई है। ‘णमो अरिहंताणं’ से ‘णमो लोए सव्वसाहूणं’ तक के पद व्यक्ति को गुण, संयम और आत्मविकास की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि मोहनखेड़ा महातीर्थ की पावन धरा इस बात की साक्षी है कि युगप्रधान दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब ने अपने जीवन के कठिन क्षणों में इसी महामंत्र को आधार बनाया। समाज में चेतना जागरण और कालजयी ग्रंथों की रचना में भी इसकी साधना की शक्ति निहित रही।

मुनि श्री के अनुसार आधुनिक विज्ञान भी मंत्रों की विशिष्ट ध्वनियों के सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार करता है। नवकार मंत्र की ध्वनि मानसिक नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, जिससे व्यक्ति के भीतर शांति और स्थिरता का भाव विकसित होता है।

उन्होंने कहा कि विश्व नवकार दिवस की सार्थकता तभी है जब लोग मैत्री, करुणा और आत्मशुद्धि के भाव को अपने व्यवहार में उतारें। यदि मन शुद्ध होगा तो समाज और विश्व दोनों में शांति स्थापित होगी।

इस अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक नवकार महामंत्र का जाप करने का आह्वान किया, ताकि विश्व में सुख, शांति और सद्भावना का विस्तार हो सके।

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