फाटक के फरमान का रसूख, मुख्तार के मौत पर खड़ी मिस्ट्री!

लखनऊ। पूर्वांचल का चर्चित जिला गाजीपुर इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है जिसकी वजह भी वही युसुफपुर का फाटक है जहां बैठकर माफिया कहें या मसीहा बाहुबली मुख्तार अंसारी ने कई दशकों तक अपना साम्राज्य चलाया और 25 सालों तक विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। साल 2005 में जेल जाने से पहले इसी फाटक के फरमान पर पूर्वांचल में पूरे धाक से चलते थे बल्कि नेपाल समेत कई देशों तक मुख़्तार की तूती बोलती थी। जेल जाने के बाद भले ही फाटक की पहले वाली रौनक कुछ कम हुई हो लेकिन जेल से भी मुख्तार की हनक और उसके फरमान वैसे ही पूरे ठसक के साथ चलते रहे। अब जबकि बीते 28 मार्च को मुख़्तार की मौत जेल और अस्पताल के दरम्यान हो चुकी है, तब ऐसे में भी युसुफपुर, मोहम्मदाबाद, गाजीपुर समेत पूरे पूर्वांचल में एक अजीब तरह की खामोशी ,बेचैनी और कुछ सवाल हर किसी के जेहन में बस चुका है। मतलब जितनी मिस्ट्री के साथ मुख़्तार जीया उतनी ही मिस्ट्री उसकी मौत की वजह को लेकर भी है।

युसुफपुर से लेकर पूरे गाजीपुर में तकरीबन हर किसी के जुबां पर बस एक ही सवाल आ जाता है कि आखिर मुख्तार के मौत की असली वजह है क्या। जब तरुणमित्र लखनऊ की टीम ने स्थानीय लोगों से मुख़्तार की शख़्सियत से लेकर उसकी मौत को लेकर परिवार के लोगों द्वारा जहर देने के आरोपों के बारे में बात की तो तकरीबन हर किसी को ये यकीं नहीं हो रहा कि तकरीबन सात फुट दो इंच के सेहतमंद मुख़्तार को हार्ट अटैक भी पड़ सकता है।
 
एक स्थानीय निवासी और खुद को मुख़्तार का बेहद खासम-खास बताने वाले एक शख्श ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि मुख्तार चाहें जेल में रहें हो या फिर जेल से बाहर वो अपने शरीर और सेहत को लेकर हमेशा सजग रहते थे जेल में रहने के दौरान भी उनके लिए बकायदा बैडमिंटन कोर्ट, व्यायामशाला से लेकर वो सारी सुविधाएं उसे मुहैया रहती थीं, जिससे वो फिट रहे। बहुत कम लोगों को पता होगा कि मुख़्तार रस्सी पर भी चल लेता था।

फिर रिपोर्टिंग टीम ने युसुफपुर दौरे के दौरान तकरीबन उन सभी पहलुओं को टटोलने की कोशिश की जिसके जरिये मुख़्तार के जीते जी और उसकी मौत के बाद पूर्वांचल का माहौल क्या है और इसका असर हालिया चुनावों पर कितना और कैसे पड़ेगा। मुख़्तार की मौत के बाद से पूर्वांचल की सियासत में सरगर्मी बढ़ गई है जिसे बेहद सधे अंदाज में मुख़्तार के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी समेत पूरा अंसारी कुनबा तय रणनीति के तहत चुनावी मुद्दा बनाने में अब तक सफल रहा है। युसुफपुर के फाटक पर बीते 28 मार्च की रात से ही सरगर्मियां बढ़ी हुई है। तरुणमित्र की टीम ने मौके पर जब फाटक का जायजा लिया तो सैकड़ों कुर्सियों पर बतियाते लोग सुबह से ही मीडिया-पुलिस की भारी भरकम मुस्तैदी के बीच अफजाल बारी-बारी से पहले अपने लोगों मुख़्तार के चाहने वालों से मिलते हैं।

अफज़ाल होते आक्रामक, बीजेपी दिखती बैकफुट पर...!

इस बीच सबसे गौर करने वाली बात ये लगी कि मुख्तार की मौत के बाद वो चाहे उनके भाई अफजाल हों मुख्तार का छोटा बेटा उमर अंसारी हो या भतीजा विधायक मन्नू अंसारी इन सभी के बयान मीडिया के लिये सधे और तकरीबन एकजैसे ही होते हैं।  कई स्थानीय नेताओ से तरुणमित्र की टीम ने जब मुख़्तार की मौत पर उनकी प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की तो वो बचते नजर आये हलाकि बीजेपी आईटी सेल समेत जिला प्रशासन का खुफिया सेल हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहा है।  इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के उपराजयपाल और गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिन्हा की टीम के लोग भी इस पूरे मामले में बेहद सधा हुआ रुख अख्तियार किये हैं हालांकि कृष्णानंद राय के पुत्र पीयूष राय और उनकी पत्नी विधायिका अल्का राय मीाडिया में जरूर थोड़ा बहुत बोल रहे हो लेकिन इस पूरे मामले में बीजेपी फ्रंटफुट पर खेलने से परहेज ही कर रही है।

अंसारी बंधुओं का वार रूम, हर गतिविधि पर पैनी नज़र...!

कम ही जानते होंगे कि मुख्तार की मौत के बाद से अंसारी घराने ने बाकायदा एक वार रूम बनाया है जिसमे मीडिया में चलने वाली हर खबर के साथ ही शासन-प्रसाशन हर गतिविधियों पर नजर रखी जाती है इसी के जरिये अगले दिन का स्टैंड तैयार किया जाता है। मसलन पूर्व डीजीपी और राजयसभा सांसद बृजलाल ने मुख़्तार पर जैसे ही मीडिया को अपनी बाईट दी अफजाल से लेकर पूरे अंसारी कुनबे का मिडिया एंगल आक्रामक हो गया।
 
हालांकि मुख़्तार के सबसे बड़े भाई पूर्व विधायक शिगबतुल्ला अंसारी हमेशा की ही तरह रोज के दौरान मस्जिद में ही रह रहे हैं। ऐसे में जिस फाटक पर कभी जरूरतमंद ,फरियादी आते थे अब वहां सियासी खिलाड़ी संवेदनाओं का लबादा ओढ़े आ रहे हैं वो चाहे ओवैसी , स्वामीप्रसाद मौर्या हो या अखिलेश यादव।
 
इन सभी को अच्छे से पता है कि 2024 के आम चुनाव में पूर्वांचल के तकरीबन आठ सीटों समेत पश्चिम यूपी की कई सीटों पर भी मुख्तार की मौत और उसके बाद फाटक में बैठ कर अफजाल अंसारी का छोटे से छोटा बयां सियासत के ऊँट को किसी भी करवट बिठाने की कूबत रखता हैं यही वजह है कि चचेरे भाई धर्मेंद्र को गाजीपुर पहले ही भेजने के बाद भी आखिरकार सपा मुखिया अखिलेश यादव को खुद की आमद फाटक पर दर्ज करवानी ही पड़ गई। कुछ यही हाल गाजीपुर में बीजेपी का भी है मुख्तार की मौत के बाद से ही स्थानीय बीजेपी नेता इस पूरे मामले में बेहद सावधानी के साथ खामोशी बरते हैं। 
 

खबरें और भी हैं

Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.