श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ में उमड़ा आस्था का सैलाब, गंगा महाआरती से साकार हो रही ‘द्वितीय काशी’ की परिकल्पना

बलिया: महर्षि भृगु की तपोभूमि बलिया के रामगढ़ (गंगापुर) में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ इन दिनों श्रद्धा और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है। महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम के तत्वावधान में चल रहे इस भव्य आयोजन के दूसरे दिन भक्ति, वेद मंत्रों और आध्यात्मिक संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिला।

गंगा महाआरती बनी आकर्षण का केंद्र

महायज्ञ के विशेष आकर्षण के रूप में आयोजित भव्य गंगा महाआरती ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। गंगा तट पर हजारों दीपों की जगमगाहट, शंखनाद और वेद मंत्रों के उच्चारण के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो।

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महाआरती का नेतृत्व करते हुए आचार्य मोहित पाठक ने उपस्थित श्रद्धालुओं को विशेष संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि महर्षि भृगु की इस पावन धरती को ‘द्वितीय काशी’ के रूप में विकसित करना हम सभी का साझा लक्ष्य होना चाहिए, ताकि यहां की आध्यात्मिक चेतना विश्वभर में प्रकाश फैलाए।

इस दौरान गुरुकुलम के बटुकों ने सस्वर वेद पाठ कर पूरे माहौल को और अधिक दिव्य बना दिया।

श्रीराम कथा से भक्त हुए भाव-विभोर

महायज्ञ के दूसरे दिन आचार्य उत्कर्ष ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रीराम कथा का रसपान कराया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से समाज में नैतिकता, त्याग और धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।

दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु कथा श्रवण कर भाव-विभोर नजर आए। वक्ताओं ने कहा कि यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विलुप्त होती वैदिक संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का एक सशक्त माध्यम भी है।

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