पांच करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की डीएम ने की समीक्षा, लापरवाही पर सख्त निर्देश

बलिया। जिलाधिकारी ने पांच करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन एवं पूर्ण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए विभिन्न विभागों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में संचालित सभी परियोजनाओं के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाएं, ताकि कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित हो सके।

बैठक में जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि जिन विद्यालयों में बच्चों की संख्या के सापेक्ष अध्यापक तैनात हैं, उनकी सूची उपलब्ध कराई जाए। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी को जिले के 19 सीएचसी और 36 पीएचसी केंद्रों के निरीक्षण एवं जांच के लिए टीम गठित करने तथा निर्माणाधीन एवं पूर्ण भवनों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए।

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जिला पंचायत राज अधिकारी को ग्राम पंचायत सचिवालयों की जांच एडीओ पंचायत के माध्यम से कराने को कहा गया। वहीं डीसी मनरेगा को सभी ब्लॉकों में मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की जांच के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए गए। एक्सईएन को जिले की नौ परियोजनाओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया, ताकि उनकी जांच कराई जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में आवास योजनाओं की भी जांच कराने के निर्देश दिए गए। यूपीपीसीएल कार्यदायी संस्था द्वारा कृषि विभाग के निर्माण कार्य के लिए भूमि चिन्हित न किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए शासन को तत्काल पत्र भेजने के निर्देश दिए।

मैरीटार गांव में चल रहे इको पर्यटन विकास कार्य के अधूरा पाए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। बैठक में अनुपस्थित रहने पर पर्यटन अधिकारी का एक दिन का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए। सीएचसी मनियर का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराने तथा नगर क्षेत्र में खाकी बाबा मंदिर निर्माण कार्य जून माह तक पूरा कराने के निर्देश भी दिए गए।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बेलहरी अकादमी ब्लॉक के छात्रावास भवन का निर्माण अधूरा मिलने पर जिलाधिकारी ने जून तक कार्य पूर्ण कराने को कहा। जिले में प्रस्तावित सात नलकूप निर्माण परियोजनाओं में लापरवाही पाए जाने पर एक्सईएन नलकूप विभाग को चेतावनी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

आईजीआरएस समीक्षा में भी डीएम सख्त

जिलाधिकारी ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन विभागों में 75 प्रतिशत से कम शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लिया जाएगा, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि नौ विभागों द्वारा शिकायतकर्ताओं से फीडबैक नहीं लेने के कारण पोर्टल पर शून्य अंक प्राप्त हुए हैं, जो गंभीर लापरवाही दर्शाता है। इस पर संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक लेने तथा मौके की फोटोग्राफ अपलोड करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निस्तारण आख्या 12 कॉलमों में पूर्ण रूप से अपलोड करना अनिवार्य होगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी , सीआरओ त्रिभुवन, एडीएम अनिल कुमार, जिला विकास अधिकारी आनंद प्रकाश, सीएमओ तथा अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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