कुत्ते के लिए एसी कमरा, सुबह-शाम नाश्ता-भोजन: पूरे ठाठ-बाट से रहता बलिया का ‘टूफी’,

बलिया। भीषण ठंड में हीटर और तपती गर्मी में एसी कमरे का सुकून हर इंसान को नहीं मिल पाता, लेकिन बलिया में एक कुत्ता ऐसा भी है, जो पूरे ठाठ-बाट के साथ रहता है। यहां पालतू कुत्ते के लिए अलग एसी कमरा, सुसज्जित बेड, कंबल और तय समय पर नाश्ता-भोजन की व्यवस्था है। यह कहानी है बलिया के एक युवा पत्रकार के पालतू कुत्ते ‘टूफी’ की, जिसे परिवार के सदस्य की तरह रखा जाता है।

बलिया सदर तहसील के अगरौली गांव निवासी आशीष दूबे बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही जीव-जंतुओं से प्रेम रहा है। पहले भी उनके घर में कई कुत्ते रहे, जिन्हें परिवार की तरह स्नेह मिला। फरवरी 2025 में घर का चौथा मेहमान बना ल्हासा एप्सो नस्ल का कुत्ता, जिसका नाम टूफी रखा गया। 27 जनवरी 2025 को जन्मे टूफी को लखनऊ से पशु चिकित्सक की देखरेख में लाया गया और उसका जन्म प्रमाण पत्र भी बनवाया गया है।

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एसी कमरा, खास डाइट और पूरा आराम

टूफी के लिए अलग एसी कमरा, आरामदायक बेड और कंबल की व्यवस्था है। उसके भोजन का भी पूरा ख्याल रखा जाता है

सुबह: अमरूद, सेब, गाजर, खीरा या सोयाबीन

लगभग 10 बजे: रोटी-दूध

दोपहर: चावल-दही

रात: अंडा-रोटी (पसंदीदा)

आशीष की मां रोज़ सुबह-शाम उसके लिए भोजन बनाती हैं और टूफी परिवार के साथ ही खाना खाता है।

किचन से बेडरूम तक साथ-साथ

परिवार के सभी सदस्य टूफी को बच्चों जैसा स्नेह देते हैं। वह दिनभर घर में सबके साथ रहता है—कभी खेलते हुए, तो कभी मां के किचन में खाना बनाते समय पास बैठकर। उसके लिए खिलौनों के साथ-साथ पलना तक लगाया गया है, ताकि वह पूरी तरह सुरक्षित और आरामदायक महसूस करे।

परसाद न मिले तो रूठ जाता है

आशीष बताते हैं कि सुबह पूजा के समय घंटी बजते ही टूफी पहुंच जाता है। पूजा के बाद अगर उसे सबसे पहले परसाद न मिले, तो वह रूठ जाता है—न भोजन करता है, न घर में आगे-पीछे घूमता है। कई बार पूरे दिन अपने कमरे में बैठा रहता है और मनाने पर ही मानता है।

टूफी की यह कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो पालतू जानवरों को सिर्फ़ जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा मानते हैं—प्यार, समय, सही पोषण और सम्मान के साथ।

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