कोटक महिंद्रा प्राइम समर्थित सेवलाइफ फाउंडेशन ने एनएच-60 पर आघात जीवन सहायता प्रशिक्षण आयोजित किया

नासिक, फरवरी 2026। कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) पहल से समर्थित सेवलाइफ फाउंडेशन (एसएलएफ) ने महाराष्ट्र के नासिक जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-60 (एनएच-60) के उच्च जोखिम वाले पिंपलगांव–मालेगांव खंड पर प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ताओं और प्रवर्तन कर्मियों के लिए बेसिक ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट (बीटीएलएस) प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।

यह प्रशिक्षण एसएलएफ के ‘जीरो-फैटैलिटी कॉरिडोर’ (जेडएफसी) कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के बाद ‘गोल्डन आवर’ के दौरान आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया को मजबूत करना और एनएच-60 पर रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करना है। कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी को नासिक और 11 फरवरी को मालेगांव में 50-50 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।

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सेवलाइफ फाउंडेशन ने कहा कि यह पहल क्रिटिकल कॉरिडोर पुलिस टीमों की जीवन रक्षक क्षमताओं को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है, ताकि दुर्घटना के तुरंत बाद पीड़ितों को समय पर और प्रभावी सहायता मिल सके। संगठन के अनुसार, प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ताओं के कौशल विकास में निवेश सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

इस अवसर पर कोटक महिंद्रा प्राइम के पूर्णकालिक निदेशक सूरज राजप्पन ने कहा कि सुरक्षित समुदायों का निर्माण कंपनी की सीएसआर रणनीति का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि आपातकालीन सेवाओं को सशक्त बनाना और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना जीवन बचाने में प्रत्यक्ष योगदान देता है और यह राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा प्राथमिकताओं तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है।

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सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीयूष तिवारी ने कहा कि विभिन्न शोध अध्ययनों से यह स्पष्ट होता है कि सड़क दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन आवर’ में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से बड़ी संख्या में रोकी जा सकने वाली मौतों को टाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स को प्रशिक्षित कर एक प्रभावी और सुव्यवस्थित ट्रॉमा रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार करना संगठन का प्रमुख उद्देश्य है।

सेवलाइफ फाउंडेशन ने बताया कि जीरो-फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम के तहत वह सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर डेटा-आधारित और प्रणालीगत दृष्टिकोण से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को समाप्त करने के लिए काम कर रहा है। इस कार्यक्रम में इंजीनियरिंग खतरों को कम करना, प्रवर्तन को मजबूत करना, दुर्घटना के बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया में सुधार और प्राथमिक प्रतिक्रियाकर्ताओं की क्षमता बढ़ाना शामिल है।

फाउंडेशन के अनुसार, एनएच-60 के पिंपलगांव–मालेगांव के 120 किलोमीटर लंबे खंड पर चिन्हित ब्लैकस्पॉट्स पर किए गए सुरक्षा उपचारों से ठोस परिणाम सामने आए हैं। अगस्त 2024 में उपचारित उमरान गांव क्षेत्र में 2022–23 के दौरान 13 घातक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें आठ लोगों की मौत हुई थी। उपचार के बाद अगस्त 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच इस क्षेत्र में एक भी सड़क दुर्घटना मृत्यु दर्ज नहीं की गई।

बीटीएलएस प्रशिक्षण एनएच-60 के लिए जेडएफसी कार्यक्रम के तहत नियोजित हस्तक्षेपों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर), रक्तस्राव नियंत्रण, सर्वाइकल स्पाइन स्थिरीकरण, वायुमार्ग प्रबंधन, घटनास्थल सुरक्षा और पीड़ित के प्रारंभिक आकलन जैसी जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा ‘गोल्डन आवर’ और गुड समैरिटन कानून की जानकारी भी प्रदान की गई।

सेवलाइफ फाउंडेशन ने बताया कि अब तक देशभर में 26,000 से अधिक आपातकालीन प्रतिक्रिया कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। संगठन ने कहा कि वह सरकारी एजेंसियों और कॉरपोरेट भागीदारों के सहयोग से भारत के उच्च जोखिम वाले राजमार्गों और जिलों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों को मजबूत करने और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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