काशी में सजेगा लेखकों–कवियों का महाकुंभ, फेस्ट–काशी साहित्य–कला उत्सव की तैयारियां तेज

वाराणसी। काशी में 30 जनवरी से शुरू होने जा रहे बनारस लिट फेस्ट–काशी साहित्य–कला उत्सव (चतुर्थ संस्करण) की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक ने रविवार को बताया कि यह उत्सव केवल साहित्य तक सीमित नहीं, बल्कि भाषा, समाज, कला, संगीत, लोक-परंपरा, शास्त्रीय चेतना, विचार, शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और समकालीन विमर्श का समग्र मंच है।

30 जनवरी से 1 फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश से 250 से अधिक लेखक, कवि, कलाकार, विचारक, पत्रकार, शिक्षाविद और सांस्कृतिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इस वर्ष हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं की सशक्त उपस्थिति रहेगी। कविता, कथा, आलोचना, नाटक, सिनेमा और पत्रकारिता के साथ-साथ लोक एवं शास्त्रीय संगीत, नृत्य, नाट्य और दृश्य-कला की प्रस्तुतियां दर्शकों को आकर्षित करेंगी।

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उत्सव की औपचारिक शुरुआत 29 जनवरी को अस्सी घाट पर गंगा आरती और सद्गुरु रितेश्वर महाराज के प्रवचन से होगी। मुख्य कार्यक्रमों का शुभारंभ 30 जनवरी को होटल ताज गंगा में किया जाएगा। युवाओं, नवीन विचारों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विज्ञान, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों पर केंद्रित विशेष सत्र भी आयोजन का प्रमुख आकर्षण होंगे।

इस आयोजन में पीयूष मिश्रा, अशोक वाजपेयी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, अनुपम खेर, दमोदर मौजो, डैन मॉरिसन, मालिनी अवस्थी, पुलेला गोपीचंद, पद्मश्री निरंजन गोस्वामी, अरुण कमल, गगन गिल, ममता कालिया, बद्री नारायण, रवि दत्ता, पेगी मोहन, राकेश कुमार सिंह, कनिष्का गुप्ता, मनीष खुराना, अर्चना गोराडिया गुप्ता, संगीता, ओलंपियन ललित उपाध्याय, डॉ. सत्यजीत प्रधान, डॉ. नवीन खत्री, डॉ. गिरीश रामभाटलाले, जनरल अरुण आनंदराय, अभिज्ञान प्रकाश, राधिका अयंगर, अभिषेक तिवारी और सौरभ चक्रवर्ती सहित अनेक विशिष्ट अतिथि शिरकत करेंगे।

आयोजकों के अनुसार, यह उत्सव काशी की सांस्कृतिक विरासत को समकालीन विमर्श से जोड़ते हुए साहित्य और कला का जीवंत उत्सव बनेगा।

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