श्रीराम के आदर्श जीवन से मिलता है मर्यादा और सद्भाव का संदेश : राजन जी महाराज

बांसडीह (बलिया)। बेरूआरबारी क्षेत्र स्थित भगवान दास मंदिर, करीहरा में बाबा अमरनाथ सेवा समिति एवं विधायक केतकी सिंह के संयोजन में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रसिद्ध कथा वाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रीराम के अवतार की महिमा बताते हुए कहा कि उनके जन्म के साथ ही माता कौशल्या, महाराज दशरथ और गुरु वशिष्ठ को यह अनुभूति हो गई थी कि स्वयं परमब्रह्म ने उनके घर अवतार लिया है।

कथा के दौरान राजन जी महाराज ने कहा कि माता कौशल्या, महर्षि वशिष्ठ और महाराज दशरथ उन सौभाग्यशाली व्यक्तित्वों में थे, जिन्होंने श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचान लिया था। वे जानते थे कि अयोध्या में जन्मा यह बालक कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि स्वयं भगवान का अवतार है। इसके बावजूद उन्होंने धर्म, मर्यादा और कर्तव्य के आदर्शों का पालन करते हुए समाज को श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा दी।

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उन्होंने अपने प्रवचन में मानव जीवन का संदेश देते हुए कहा कि जो व्यक्ति यह स्वीकार कर लेता है कि एक दिन उसे इस संसार से विदा होना है, उसके जीवन से अहंकार, विरोध और वैमनस्य स्वतः समाप्त होने लगता है। मृत्यु का स्मरण मनुष्य को विनम्रता, प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ श्रीराम कथा का श्रवण किया। समापन पर भगवान श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

इस अवसर पर विधायक केतकी सिंह, पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान, राकेश सिंह, राना कुनाल सिंह, विश्राम सिंह, कौशल मिश्र सहित अनेक गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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