सीतापुर में कमल के खिलने की राह में रोड़ा अटका सकते हैं महेन्द्र सिंह यादव

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी(बसपा) ने सीतापुर लोकसभा से भाजपा के पूर्व विधायक महेन्द्र सिंह यादव को अपना प्रत्याशी बनाकर चुनाव मुकाबले को रोचक बना दिया है। सीतापुर से भाजपा से वर्तमान सांसद राजेश वर्मा और सपा कांग्रेस गठबंधन से राकेश राठौर मैदान में हैं।बसपा से महेन्द्र सिंह यादव के चुनाव में उतरने से सीतापुर में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार बन गये हैं। बसपा के वोटबैंक और यादव मतदाताओं की बदौलत वह भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार राजेश वर्मा 514528 वोट पाकर विजयी हुए थे।

वहीं बसपा से नकुल दुबे 413695 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे।महेन्द्र सिंह यादव 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट से बिसवां से विधायक चुने गये थे। 2022 के विधानसभा चुनाव के ऐन वक्त उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके कारण उनको भाजपा ने टिकट नहीं दिया।महेन्द्र सिंह यादव टिकट कटने के पीछे सीतापुर सांसद राजेश वर्मा को मानते हैं। हालांकि टिकट कटने के बाद विधानसभा चुनाव में महेन्द्र यादव ने भाजपा प्रत्याशी निर्मल वर्मा के लिए गांव—गांव जाकर वोट भी मांगा था।

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लोकसभा चुनाव नजदीक आया तो महेन्द्र यादव लोकसभा में सक्रिय हुए और पूरे लोकसक्षा क्षेत्र का दौरा शुरू किया और पार्टी नेतृत्व से टिकट की मांग की। भाजपा ने वर्तमान सांसद राजेश वर्मा पर तीसरी बार दांव लगाया। इससे खिन्न होकर महेन्द्र सिंह यादव ने पाला बदलते हुए भाजपा छोड़कर बसपा में चले गये ओर बसपा ने सीतापुर से उन्हें अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया।वरिष्ठ पत्रकार महेश शर्मा ने कहा कि महेन्द्र यादव मिलनसार हैं। बिसवां विधानसभा से वह विधायक रहे हैं। बिसवां विधानसभा यादव बाहुल्य सीट है। इसलिए वहां वह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। फिलहाल बसपा से टिकट लेकर उन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय तो बना ही दिया है।

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