जापान में प्रवासी भारतीयों से मिले सीएम योगी, पूर्ववर्ती सरकारों पर साधा निशाना

कहा— ‘अंधेरे में काम करने वालों को उजाला रास नहीं आता’

टोक्यो/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान में प्रवासी भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा और कहा कि पहले उत्तर प्रदेश में सड़कों और बिजली की कमी इसलिए थी क्योंकि “अंधेरे में काम करने वालों को उजाला रास नहीं आता।” उन्होंने कहा कि जब प्रवृत्ति डकैती की हो, तो प्रदेश को भी अंधेरे में रखा जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने तय किया कि यदि उत्तर प्रदेश को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त करना है, तो उसे उजाले में लाना होगा। हम सूर्यपुत्र हैं और हमें सूर्य जैसी रोशनी चाहिए। इसी सोच के साथ हमने प्रदेश में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की।”

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योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश कर्फ्यू, दंगों और अंधेरे के लिए जाना जाता था, लेकिन आज यह दीपोत्सव, महाकुंभ और वैश्विक निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था में सुधार, बेहतर कनेक्टिविटी और स्थिर शासन के कारण राज्य में निवेश का माहौल बदला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आज राज्य में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स पार्क और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों जैसे क्षेत्रों में निवेश हो रहा है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

उन्होंने अयोध्या के दीपोत्सव, काशी की देव दीपावली और मथुरा-वृंदावन के रंगोत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आयोजन सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं की भागीदारी उत्तर प्रदेश की क्षमता और प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है।

प्रवासी भारतीयों को होली की शुभकामनाएं देते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास और महाकुंभ जैसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक प्रबंधन का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति दुनिया पर प्रभुत्व स्थापित करने में नहीं, बल्कि मैत्री और करुणा के मार्ग पर चलने में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान को उगते सूरज की धरती कहा जाता है, जबकि भारत सूर्यपुत्रों की भूमि है। उन्होंने भारतीय दर्शन और रामराज्य की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा धर्म को केवल उपासना नहीं, बल्कि कर्तव्य से जोड़ती है।

उन्होंने जापान में रह रहे भारतीय समुदाय से भारत और जापान—दोनों देशों के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि जापान में करीब 55 हजार प्रवासी भारतीय निवास करते हैं और वे दोनों देशों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिनकी मुख्यमंत्री ने सराहना की। उन्होंने अपने साथ आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का परिचय प्रवासी भारतीयों से कराया और जापान में भारत की राजदूत नगमा मलिक तथा उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।

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