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दुनिया का पहला एक्सचेंज: NSE में अब नैनोसेकंड में होगा ऑर्डर कन्फर्म
मुंबई। वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने प्रमुख ट्रेडिंग सेगमेंट्स में ऑर्डर एक्नॉलेजमेंट को नैनोसेकंड स्तर पर पहुंचा दिया है। यह सुविधा 11 अप्रैल 2026 से कैश और इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में भी लागू कर दी गई है।
एनएसई के अनुसार, यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से लागू की गई है।
करंसी डेरिवेटिव में: 12 जुलाई 2025
कमोडिटी डेरिवेटिव में: 13 दिसंबर 2025
कैश और इक्विटी डेरिवेटिव में: 11 अप्रैल 2026
एक्सचेंज अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से रियल-टाइम ट्रेडिंग, पारदर्शिता और ऑर्डर निष्पादन की सटीकता में बड़ा सुधार होगा। निवेशकों और ट्रेडर्स को ऑर्डर की स्थिति तुरंत मिल सकेगी, जिससे फैसले लेने की गति तेज होगी और रिस्क मैनेजमेंट भी बेहतर होगा।
इस अपग्रेड के बाद एनएसई की क्षमता बढ़कर करीब 10 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रति सेकंड तक पहुंच सकती है, जो इसे वैश्विक एक्सचेंज टेक्नोलॉजी में अग्रणी बनाती है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम भारत के पूंजी बाजार को अल्ट्रा-लो लेटेंसी ट्रेडिंग के वैश्विक मानकों के और करीब ले जाएगा।
