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ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के आदेश पर हाईकोर्ट में चुनौती, राज्य सरकार से मांगा जवाब
लखनऊ। प्रदेश में पंचायत चुनाव संपन्न होने और नए ग्राम प्रधानों के चुने जाने तक वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने संबंधी राज्य सरकार के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को सरकार से समुचित निर्देश प्राप्त कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। मामले पर अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
याचिका में राज्य सरकार के 25 मई को जारी उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान ग्राम प्रधानों को पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा-12 के अनुसार ग्राम प्रधानों का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से केवल पांच वर्ष का होता है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए और इसके बजाय मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर उनके कार्यकाल को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है, जो कानून के विपरीत है।
जनहित याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि किसी कारणवश पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पा रहे हैं तो पूर्व व्यवस्था के अनुसार एडीओ पंचायत या किसी अन्य सक्षम अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाए, न कि कार्यकाल पूरा कर चुके ग्राम प्रधानों को।
अब इस मामले में हाईकोर्ट के समक्ष राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
