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प्रयागराज में आरसेटी दे रहा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर, निशुल्क प्रशिक्षण से बढ़ रही रोजगार की राह
प्रयागराज। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान महिलाओं और युवतियों को विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें स्वरोजगार के लिए तैयार कर रहा है।
प्रधानमंत्री के ‘स्किल इंडिया’ विजन के अनुरूप संचालित आरसेटी केंद्र का मुख्य फोकस कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है। प्रयागराज स्थित केंद्र में वर्तमान में 35 दिवसीय ‘जूनियर ब्यूटी प्रैक्टिशनर’ (लघु उद्यमी) प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमें 33 महिला अभ्यर्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद महिलाएं अपने घर से ब्यूटी सेवाएं शुरू कर सकती हैं या स्वयं का ब्यूटी पार्लर खोलकर रोजगार प्राप्त कर सकती हैं। संस्थान की विशेषता यह है कि बाहर से आने वाली प्रशिक्षुओं के लिए आवास की व्यवस्था भी उपलब्ध है। साथ ही, उनके कौशल को और बेहतर बनाने के लिए विशेष नाइट क्लासेज का संचालन किया जाता है।
आरसेटी की प्रशिक्षक रीना कुशवाहा ने बताया कि ‘जूनियर ब्यूटी प्रैक्टिशनर’ प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क है और इसका उद्देश्य महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी जाती है।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद यदि वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, तो संस्थान की ओर से मुख्यमंत्री युवा योजना और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण प्राप्त करने में भी सहायता दी जाती है, जिससे महिलाएं अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें।
रीना कुशवाहा के अनुसार, 35 दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार लोगों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल कौशल सिखाना नहीं, बल्कि प्रशिक्षुओं को रोजगारोन्मुख बनाकर आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाना है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं ने भी इस पहल की सराहना की। उर्मिला पटेल और पुष्पा ने बताया कि सिलाई और ब्यूटीशियन जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उनके अनुसार, प्रशिक्षण के बाद महिलाएं स्वयं का रोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बन रही हैं। सरकारी योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई राह दिखाई है।
