महर्षि भृगु की तपोभूमि पर गूंजे वेद मंत्र, बलिया में 21 बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार

बलिया: द्वितीय काशी के रूप में विख्यात भृगु नगरी बलिया के गंगापुर-रामगढ़ स्थित महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम में आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के पावन अवसर पर रविवार को 21 बटुकों का सामूहिक उपनयन (यज्ञोपवीत) संस्कार वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

महायज्ञ के दिव्य वातावरण में 21 बटुकों ने जनेऊ धारण कर अपने नए आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश किया। आचार्य शौनक द्विवेदी और अमन जी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी बटुकों को दीक्षित किया गया। उपनयन के बाद बटुकों ने आजीवन वेद सेवा और राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

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गुरुकुलम के संस्थापक आचार्य मोहित पाठक ने उपनयन संस्कार की महत्ता बताते हुए कहा कि यह मनुष्य का ‘दूसरा जन्म’ माना जाता है। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत केवल एक धागा नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुशासन और धर्म के प्रति उत्तरदायित्व का प्रतीक है।

आचार्य मोहित पाठक ने बताया कि गुरुकुलम का उद्देश्य नई पीढ़ी को सनातन संस्कृति और वेदों के ज्ञान से जोड़ना है, ताकि युवा पीढ़ी संस्कार और परंपरा से जुड़ी रहे।

इस आयोजन का मुख्य आकर्षण प्रतिदिन होने वाली भव्य गंगा महाआरती भी रही। गंगा तट पर दीपों की रोशनी, शंखनाद और वैदिक मंत्रों के बीच हो रही आरती से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इसमें शामिल होकर बटुकों को आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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