बजट पर पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी की तीखी प्रतिक्रिया, बोले, आम आदमी को अब भी राहत का इंतजार

बलिया। केंद्रीय सरकार के नौवें बजट को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बजट के समय देश के करोड़ों लोग इस उम्मीद में रहते हैं कि उनकी आमदनी बढ़ेगी, महंगाई से राहत मिलेगी और भविष्य के लिए कुछ बचत के अवसर बनेंगे, लेकिन इस बार भी आम जनता की उम्मीदें अधूरी रह गईं।

रामगोविंद चौधरी ने कहा कि संसद के भीतर जब वित्त मंत्री बजट भाषण पढ़ती हैं तो सत्ता पक्ष के सांसद इसे ऐतिहासिक बताकर तालियां बजाते हैं, लेकिन संसद से बाहर निकलते ही आम आदमी के हाथ में केवल बजट दस्तावेज रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारों और वास्तविक राहत की जनता को दरकार है, वे इस बजट में नजर नहीं आते।

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पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि बजट को बारीकी से देखा जाए तो यह उन वर्गों के लिए निराशाजनक है, जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रोजगार को लेकर उन्होंने कहा कि बजट में ‘रोजगार’ शब्द का इस्तेमाल तो होता है, लेकिन युवाओं के लिए कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता। डिग्रीधारी युवाओं को आंकड़ों से नहीं, बल्कि वास्तविक नौकरियों की जरूरत है।

किसानों के मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी और लागत के मुकाबले दोगुने दाम की मांग अब भी फाइलों में दबी हुई है। बढ़ती खेती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच किसानों को मिली राहत नाकाफी है। उन्होंने इसे ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ बताया।

उन्होंने कहा कि महंगाई के इस दौर में मध्यम वर्ग और मजदूर तबके को टैक्स स्लैब या सब्सिडी के जरिए सीधी राहत की उम्मीद थी, लेकिन बजट ने उन्हें एक बार फिर बाजार के भरोसे छोड़ दिया है।

रामगोविंद चौधरी ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देश के अंतिम व्यक्ति की जरूरतों और मुस्कान का दस्तावेज होना चाहिए। जब तक बजट के आंकड़े आम आदमी की रसोई और युवाओं के रोजगार तक नहीं पहुंचते, तब तक इसे ऐतिहासिक कहना केवल एक राजनीतिक दावा भर रहेगा। उन्होंने कहा कि जनता को भाषण नहीं, बल्कि ठोस राहत और शासन में वास्तविक हिस्सेदारी चाहिए।

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