एआई से बने फर्जी प्रिस्क्रिप्शन जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा, तत्काल प्रतिबंध जरूरी : आनंद सिंह

बलिया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से तैयार किए जा रहे फर्जी चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन जन-स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। इस पर तत्काल रोक लगाए जाने की मांग बलिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद सिंह ने की है।

आनंद सिंह ने बताया कि देश की सर्वोच्च संस्था ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने एआई के बढ़ते दुरुपयोग पर गहरी चिंता जताई है। एआई की मदद से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन बनाकर एंटीबायोटिक्स, साइकोट्रोपिक दवाएं, ओपिऑइड्स और शेड्यूल H एवं X की दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री की जा रही है।

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उन्होंने बताया कि AIOCD के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने जानकारी दी है कि एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र की हालिया रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म काल्पनिक अस्पतालों और मनगढ़ंत चिकित्सकीय विवरणों वाले एआई-जनित प्रिस्क्रिप्शन को भी स्वीकार कर रहे हैं।

AIOCD का आरोप है कि कई अवैध ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म सरकारी अधिसूचनाओं GSR 817(E) और GSR 220(E) का दुरुपयोग कर Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत तय सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर रहे हैं। ऑफलाइन केमिस्टों के यहां जहां प्रिस्क्रिप्शन का मानवीय स्तर पर सत्यापन होता है, वहीं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रभावी जांच प्रणाली के अभाव में एआई द्वारा बनाए गए फर्जी प्रिस्क्रिप्शन की पहचान करना लगभग असंभव हो गया है।

आनंद सिंह ने कहा कि यह स्थिति न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की जान के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। AIOCD ने प्रधानमंत्री कार्यालय और ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मांग की है कि जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए GSR 817(E) और GSR 220(E) को तत्काल वापस लिया जाए।

उन्होंने यह भी मांग की कि अवैध ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म को तुरंत बंद किया जाए और एआई द्वारा तैयार किए गए प्रिस्क्रिप्शन को पूरे देश में अवैध घोषित किया जाए, ताकि दवाओं के दुरुपयोग और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों को रोका जा सके।

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