DIOS ने FIR को बताया 'पुलिस की नासमझी', कार्रवाई निरस्त करने के लिए लिखा उच्चाधिकारियों को पत्र

बलिया : श्री लंगटू बाबा इंटर कॉलेज हड़िहा कलां के दिवंगत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामप्रीत सिंह की सेवा पुस्तिका से जुड़े विवाद में बलिया पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर अब शिक्षा विभाग की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। मामले में संयुक्त शिक्षा निदेशक (आजमगढ़) दिनेश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार गुप्त, और जीआईसी सिधौली के प्रधानाचार्य ओमप्रकाश यादव समेत चार लोगों के खिलाफ विश्वासघात का मुकदमा दर्ज किया गया है।

हालांकि, बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) देवेंद्र कुमार गुप्त ने इस एफआईआर को पुलिस की नासमझी करार देते हुए पुलिस अधीक्षक बलिया, पुलिस महानिदेशक लखनऊ, पुलिस महानिरीक्षक वाराणसी, पुलिस उपमहानिरीक्षक आजमगढ़, क्षेत्राधिकारी बैरिया और संबंधित थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर प्राथमिकी निरस्त करने की मांग की है।

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DIOS ने स्पष्ट किया कि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सेवापुस्तिका की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन, प्रधानाचार्य व लिपिक की होती है। ऐसे में रेवती थाना पुलिस ने भ्रमवश गलत लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर दिया। उन्होंने बताया कि यह प्रकरण वर्ष 2000 से संबंधित है, जबकि उनके सहित अन्य नामजद अधिकारी वर्ष 2023 और 2024 में अपने-अपने पदों पर नियुक्त हुए हैं।

DIOS ने यह भी बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में पुलिस को यह निर्देश दिया गया था कि रामप्रीत सिंह की मूल सेवा पुस्तिका के गायब होने और डुप्लीकेट में छेड़छाड़ के मामले की पड़ताल की जाए, साथ ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जाए — चाहे वह संस्था के पदाधिकारी हों या विभाग के।

हाईकोर्ट के आदेश (दिनांक 26.05.2025) में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस को उन सभी पदाधिकारियों की भूमिका की जांच करनी है जो उस समय पद पर कार्यरत थे, न कि वर्तमान में कार्यरत अधिकारियों की। बावजूद इसके पुलिस ने वर्तमान DIOS, संयुक्त शिक्षा निदेशक और प्रधानाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी।

DIOS ने मीडिया को बताया कि विवादित याचिका (संख्या 80/2016, देवेंद्र कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार) अभी न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें याची ने रामप्रीत सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद रिक्त पद पर अपनी नियुक्ति दिखाते हुए सेवा पुस्तिका प्रस्तुत करने की मांग की थी।

DIOS ने मांग की है कि तथ्यों की गंभीरता को समझते हुए और अदालती निर्देशों का सही पालन करते हुए उन्हें, संयुक्त शिक्षा निदेशक और प्रधानाचार्य के नाम प्राथमिकी से हटाए जाएं।

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