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Ballia News: बंकवा गांव में मिले 2200 वर्ष पुराने अवशेष, पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक जांच में शुंग, कुषाण और गुप्तकाल के मिले प्रमाण
बलिया: बांसडीह तहसील क्षेत्र के बंकवा गांव में तालाब की खुदाई के दौरान मिली प्राचीन ईंटों की संरचना ने क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को नई पहचान दी है। उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग की प्रारंभिक जांच में यहां से मिले अवशेष करीब 2200 वर्ष पुराने पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थल पर शुंग, कुषाण और गुप्तकाल की संस्कृति से जुड़े प्रमाण मिले हैं।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी राम नरेश पाल के नेतृत्व में पहुंची टीम ने स्थल का विस्तृत निरीक्षण किया। सर्वेक्षण दल में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भारत कला भवन के पूर्व निदेशक डॉ. वेद प्रकाश शर्मा और फोटोग्राफर राजीव रंजन भी शामिल रहे। इस दौरान स्थानीय इतिहास शोधकर्ता डॉ. अमृत आनंद सिन्हा और जितेंद्र सिंह 'झमन' ने भी टीम को ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध कराई।
निरीक्षण के बाद डॉ. वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि प्राप्त मृदभांडों, ईंटों और अन्य अवशेषों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यह स्थल लगभग 2200 वर्ष पुराना है। यहां मिले सबसे प्राचीन अवशेष शुंग काल के हैं, जबकि अन्य अवशेष कुषाण और गुप्तकाल से संबंधित प्रतीत होते हैं। एक ही स्थल पर तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कालखंडों के प्रमाण मिलना इसके लंबे समय तक मानव बसावट और सांस्कृतिक विकास का संकेत देता है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी राम नरेश पाल ने बताया कि सर्वेक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे उत्खनन और अन्य आवश्यक कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बंकवा के समीप स्थित नरला का डीह पहले से ही पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यहां समय-समय पर प्राचीन ईंटें और मिट्टी के बर्तन मिलते रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण अब इस क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से व्यापक खुदाई कराने की मांग कर रहे हैं।
यदि भविष्य में विस्तृत उत्खनन में और महत्वपूर्ण साक्ष्य प्राप्त होते हैं, तो बंकवा गांव बलिया ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल हो सकता है।
