बदायूं: तलाक के बाद सालों तक किया दुष्कर्म, अब अदालत ने पुलिस को जांच के आदेश दिए

बदायूं। एक महिला के साथ सालों तक हुए अन्याय का मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक ने पहले एकपक्षीय तलाक दिया और बाद में समझौते के बहाने उसके साथ रहने लगा। महिला का आरोप है कि युवक ने भरोसे का गलत इस्तेमाल करते हुए दुष्कर्म किया। मामले में कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए पुलिस को 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं।

कोतवाली सिविल लाइन क्षेत्र की महिला ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसकी शादी 1993 में शहर के मोहल्ला मीरा सराय निवासी नेमचंद्र से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद नेमचंद्र बहाने बनाकर झगड़ा करने लगा और 1996 में महिला की सहमति के बिना एकपक्षीय तलाक ले लिया।

महिला ने इसके खिलाफ भरण-पोषण का केस दायर किया, जिस पर नेमचंद्र ने समझौता कर उसे अपने साथ रखने का वादा किया। उसने कहा कि वह तलाक को निरस्त कराकर उसे फिर से अपनी पत्नी बना लेगा। इस आश्वासन पर महिला उसके साथ रहने लगी।

हालांकि, तलाक निरस्त नहीं कराया गया और महिला को उसके परिवार से मिलने तक नहीं दिया। नेमचंद्र ने यह कहते हुए महिला को भ्रम में रखा कि "तलाक सिर्फ एक कागज है, मैं तुझे अपनी पत्नी मानता हूं।" इस दौरान 2008 तक उसने महिला के साथ संबंध बनाए और महिला से एक बेटा भी हुआ।

महिला के साथ छल

नेमचंद्र ने जिला पंचायत राज विभाग में नौकरी लगने के बाद महिला को घर से निकाल दिया और कहा कि उसके पास तलाक के कागजात हैं, इसलिए वह उसे अपने साथ नहीं रख सकता। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि नेमचंद्र ने बेटे के जन्म प्रमाण पत्र में माता के नाम में किसी अन्य महिला का नाम दर्ज करा दिया।

अदालत का आदेश

महिला की याचिका पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लीलू चौधरी ने पुलिस को आदेश दिया है कि मामले की विवेचना की जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि दोनों जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की जाए कि वे एक ही व्यक्ति से संबंधित हैं या अलग-अलग। साथ ही, यह भी पता लगाया जाए कि तलाक के बाद महिला ने विपक्षी के साथ सहमति से रहना जारी रखा या विपक्षी ने किसी और से विवाह किया।

पुलिस को 15 दिनों के भीतर जांच पूरी कर न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। मामला तलाक, भरोसे और दुष्कर्म से जुड़ी गंभीरता को उजागर करता है, जिसमें अब न्यायालय की कार्रवाई का इंतजार है।

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