पतंगें, कृतज्ञता और नई शुरुआत: सोनी सब के कलाकारों ने साझा कीं मकर संक्रांति की यादें

मुंबई, जनवरी 2026। रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आसमान और घरों में गूंजती खुशियों के बीच मकर संक्रांति नवीनीकरण, कृतज्ञता और एकजुटता का संदेश लेकर आती है। फसल उत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व नई शुरुआत और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस खास मौके पर सोनी सब के लोकप्रिय कलाकारों—श्रेनु पारिख (गाथा शिव परिवार की: गणेश कार्तिकेय), करुणा पांडे, नितिन बाबू, दीक्षा जोशी (पुष्पा इम्पॉसिबल), नेहा एसके मेहता, ऋषि सक्सेना और सुम्बुल तौकीर खान (इत्ती सी खुशी)—ने अपने अनुभव और बचपन की यादें साझा कीं।

श्रेनु पारिख ने उत्तरायण की मिठास को याद करते हुए बताया कि वडोदरा में पतंगबाजी, सर्दियों की धूप और मौसमी व्यंजन इस त्योहार को खास बनाते थे। विवाह के बाद उन्होंने महाराष्ट्र की परंपराओं—हल्दी-कुमकुम, काले वस्त्र और “तिल-गुड़ घ्या आणि गोड गोड बोला”—का सुंदर संगम भी अनुभव किया, जिसे वे आज भी जीवंत रखती हैं।

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ऋषि सक्सेना के लिए मकर संक्रांति सकारात्मकता और नई शुरुआत का पर्व है। बचपन की छतों पर पतंगबाजी, दोस्ताना मुकाबले और तिल-गुड़ की मिठास अब भी उनकी रस्मों का हिस्सा हैं। व्यस्त शूटिंग के बीच भी वे सेट पर मिठाइयाँ बांटकर त्योहार की भावना बनाए रखते हैं।

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दीक्षा जोशी ने गुजरात की उत्तरायण को याद करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि दोस्तों, संगीत, ‘काई पो चे’ और उंधियू-जलेबी के साथ पूरा उत्सव होता था। पुष्पा इम्पॉसिबल के परिवार संग जश्न मनाना उन्हें नॉस्टैल्जिया से भर देता है।

नेहा एसके मेहता ने त्योहार की आत्मा—मीठा बोलना, दयालुता और पॉजिटिविटी—पर जोर दिया और बताया कि सेट पर टीम व बच्चों के साथ मनाने से खुशी दोगुनी हो जाती है।

देखना न भूलें: इत्ती सी खुशी, गाथा शिव परिवार की: गणेश कार्तिकेय और पुष्पा इम्पॉसिबल—हर सोमवार से शनिवार, सिर्फ सोनी सब पर।

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