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“बच्चे सिर्फ शब्दों से नहीं, हमारे व्यवहार से सीखते हैं” : ‘हस्तिनापुर के वीर’ की गांधारी बनीं विवाना सिंह
मुंबई, जुलाई 2026। सोनी सब का पौराणिक धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ पांडवों और कौरवों के बचपन की अनकही कहानी को दर्शकों के सामने ला रहा है। शो में विवाना सिंह गांधारी की भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने किरदार, शूटिंग के अनुभव और आज के दौर में माता-पिता की जिम्मेदारियों पर खुलकर बात की।
विवाना सिंह का कहना है कि यह शो गांधारी के व्यक्तित्व का एक अलग पक्ष दिखाता है। उनके अनुसार, गांधारी 101 बच्चों की मां होने के बावजूद हर बच्चे को समान स्नेह और संस्कार देने की कोशिश करती हैं। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें एहसास होता है कि बच्चों पर परिवार और आसपास के लोगों का प्रभाव भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यह कहानी आज के माता-पिता के लिए भी एक संदेश है कि उन्हें यह जानना चाहिए कि उनके बच्चे किन लोगों के साथ समय बिता रहे हैं। जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार भी बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकता है।
ब्लाइंडफोल्ड के साथ अभिनय सबसे बड़ी चुनौती
विवाना ने बताया कि आंखों पर पट्टी बांधकर अभिनय करना उनके करियर की सबसे कठिन चुनौती रही है। सामान्य तौर पर कलाकार आंखों के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं, लेकिन गांधारी के किरदार में उन्हें आवाज़, हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज के माध्यम से भावनाएं दर्शानी पड़ती हैं।
उन्होंने कहा कि हर दृश्य उनके लिए एक नई परीक्षा की तरह होता है और यही इस किरदार को खास बनाता है।
दुर्योधन के साथ रिश्ते के दृश्य सबसे कठिन
विवाना के मुताबिक, गांधारी और दुर्योधन के रिश्ते को निभाना उनके लिए सबसे भावनात्मक अनुभव रहा। एक मां के रूप में गांधारी अपने बेटे को गलत राह पर जाते देखती हैं, लेकिन उसे सही रास्ते पर लाने की कोशिश भी करती हैं। यही संघर्ष उनके किरदार को सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनाता है।
धर्म और न्याय से मिली प्रेरणा
उन्होंने बताया कि गांधारी की सबसे बड़ी विशेषता उनका धर्म और न्याय के प्रति अटूट विश्वास है। यदि उनका अपना पुत्र भी गलत हो, तो वह उसके खिलाफ खड़े होने का साहस रखती हैं। यही गुण उन्हें व्यक्तिगत रूप से सबसे अधिक प्रेरित करता है।
आज के माता-पिता के लिए संदेश
विवाना सिंह का मानना है कि आज मोबाइल फोन ने माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा या सुविधाएं ही नहीं, बल्कि माता-पिता का समय, प्यार और मार्गदर्शन भी चाहिए।
उन्होंने कहा, “हस्तिनापुर के वीर हमें यह सिखाता है कि बच्चे सिर्फ शब्दों से मूल्य नहीं सीखते, बल्कि हमारे व्यवहार और कामों को देखकर सीखते हैं। आज हम उन्हें जो संस्कार देंगे, वही उनके भविष्य का आधार बनेंगे।”
‘हस्तिनापुर के वीर’ का प्रसारण हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे सिर्फ सोनी सब पर किया जाता है।
