Ravi Raj Success Story : दृष्टिबाधित होकर भी UPSC में 20वीं रैंक, नवादा के रवि राज ने रचा इतिहास

नवादा (बिहार) : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में बिहार के नवादा जिले के दृष्टिबाधित युवा रवि राज ने ऑल इंडिया 20वीं रैंक हासिल कर प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। आंखों से दुनिया नहीं देख पाने के बावजूद उन्होंने अपने हौसले और मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में शानदार सफलता प्राप्त की।

मूल रूप से नवादा जिले के अकबरपुर प्रखंड के महुली गांव निवासी रवि राज की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है। उनके पिता रंजन कुमार सिन्हा किसान हैं, जबकि मां विभा सिन्हा गृहिणी हैं। बेटे की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए परिवार फिलहाल नवादा शहर के नवीन नगर मोहल्ले में किराये के मकान में रह रहा है।

पांचवें प्रयास में मिली बड़ी सफलता

रवि राज के लिए यूपीएससी का सफर आसान नहीं रहा। यह उनका पांचवां प्रयास था। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हर बार नई ऊर्जा के साथ तैयारी जारी रखी। उनकी मेहनत का परिणाम इस बार 20वीं रैंक के रूप में सामने आया।

इससे पहले UPSC 2024 में भी उन्होंने 182वीं रैंक हासिल की थी, जिसके आधार पर उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में हुआ था। वर्तमान में वह नागपुर में आईआरएस प्रशिक्षण ले रहे थे, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनना था। ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार अपने लक्ष्य के करीब पहुंच गए।

BPSC भी पास कर चुके हैं रवि राज

यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही रवि राज ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 69वीं परीक्षा भी पास की थी, जिसमें उनका चयन राजस्व अधिकारी के पद पर हुआ था। उनकी इस उपलब्धि से उनकी प्रतिभा और निरंतर प्रयास का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मां बनीं बेटे की आंखें

रवि राज दृष्टिबाधित हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई नवादा जिले में ही पूरी की। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दयाल पब्लिक स्कूल से हुई, जबकि 12वीं की पढ़ाई सत्येन्द्र नारायण सिंह इंटर स्कूल, पार नवादा से की। इसके बाद उन्होंने सीताराम साहू कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की।

रवि की सफलता में उनकी मां का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी मां विभा सिन्हा हर परीक्षा में उनके साथ रहीं और उनकी आंख बनकर उनका सहयोग किया।

रवि राज की यह सफलता न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं, विशेषकर दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया कि दृढ़ निश्चय, मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।

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