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सहमति से बने शारीरिक संबंध अपराध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपसी सहमति से लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाए जाने के बाद यदि रिश्ता टूट जाता है, तो केवल उससे उत्पन्न निराशा के आधार पर धोखे या छल का आरोप लगाकर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की खंडपीठ ने नीलेश राम चंदानी की याचिका स्वीकार करते हुए शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाने से जुड़ी धारा 69 के तहत दर्ज कार्यवाही को रद्द कर दिया। हालांकि, अन्य धाराओं में दर्ज प्राथमिकी की विवेचना जारी रखने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई है।
मामले में शिकायतकर्ता ने नोएडा के सेक्टर-63 थाने में धारा 352, 351(2), 69 बीएनएस और दहेज निषेध अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी। याची की ओर से अदालत को बताया गया कि जोधपुर में एलएलएम की पढ़ाई के दौरान दोनों के बीच संबंध बने और जून 2023 में सगाई भी हुई थी। नवंबर 2024 में विवाह प्रस्तावित था, जिसके लिए होटल बुकिंग, कार्ड छपाई और फोटोग्राफर तक तय हो चुके थे।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि विवाह का वास्तविक इरादा मौजूद था, ऐसे में इसे धोखाधड़ी का मामला नहीं माना जा सकता। हालांकि, मारपीट और धमकी से जुड़े आरोपों की जांच जारी रहेगी।
