Bareilly News: पीडब्ल्यूडी कॉलोनी में अवैध कब्जा, दरोगा समेत 20 कर्मचारियों का आवास आवंटन रद्द, वसूला जाएगा किराया

बरेली। शहर की राजेन्द्र नगर स्थित लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की 222 आवासों वाली तीन मंजिला कॉलोनी में दरोगा सहित 20 सरकारी कर्मचारियों के अवैध रूप से रहने का मामला सामने आया है। इनमें से पांच कर्मचारियों के आवंटन पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि बाकी 15 ने अब तक अनिवार्य शपथपत्र नहीं दिया है। प्रशासन ने इस आधार पर सभी 20 कर्मचारियों के आवास आवंटन को निरस्त कर दिया है। साथ ही, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने किराया वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

प्रशासन की सख्ती: सत्यापन में सामने आया मामला

नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के निर्देशन में कराए गए सत्यापन अभियान में यह तथ्य सामने आया कि कॉलोनी में कई ऐसे कर्मचारी रह रहे हैं जो न तो संबंधित मानकों को पूरा करते हैं और न ही उन्होंने शपथपत्र में चार अनिवार्य बिंदुओं की जानकारी दी है।

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कलेक्ट्रेट के नजारत विभाग से प्राप्त सूची के अनुसार, जिन कर्मचारियों के आवंटन निरस्त किए गए हैं, वे विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं और कॉलोनी के टाइप-2 क्वार्टरों में रह रहे थे।

ये हैं वह 15 कर्मचारी जिन्होंने नहीं दिया शपथपत्र

1. अंजली, सहायक अध्यापक, बेसिक शिक्षा विभाग

2. बृजेश कुमार वर्मा, लिपिक, जनपद न्यायालय

3. अंकित कुमार, आरक्षी, एसएसपी कार्यालय

4. परमेंद्र, आरक्षी, एसएसपी कार्यालय

5. मनोज कुमार यादव, अमीन संग्रह, तहसील सदर

6. संजू कुमार, कनिष्ठ सहायक, शिक्षा विभाग

7. भरत सिंह, सहायक अध्यापक, बेसिक शिक्षा विभाग

8. अभिषेक कुमार शर्मा, कनिष्ठ लिपिक, लोनिवि

9. विजयपाल सिंह, उपनिरीक्षक, एसएसपी कार्यालय

10. शुभम कुमार, एसएसपी कार्यालय

11. जेएम पुष्पेंद्र सिंह, लिपिक, जनपद न्यायालय

12. मदन लाल, लिपिक, नलकूप खंड कार्यालय

13. शिव राम राना, गन्ना पर्यवेक्षक, गन्ना विभाग

14. महेंद्र पाल, लिपिक, बेसिक शिक्षा विभाग

15. विशाल गौरव, आशुलिपिक, जनपद न्यायालय

इन सभी ने अभी तक न तो विभागीय अनुमोदन दिखाया है और न ही शपथपत्र पर चार बिंदुओं की पुष्टि की है, जिससे यह प्रतीत होता है कि वे अवैध रूप से सरकारी आवासों पर कब्जा किए हुए हैं।

शिकायतों के बाद प्रशासन हुआ एक्टिव

कॉलोनी में अवैध कब्जों और अनियमितताओं की लगातार मिलती शिकायतों के बाद नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रभारी अधिकारी नजारत, कलेक्ट्रेट के माध्यम से सभी आवासों का व्यापक सत्यापन कराया था। इसके बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई।

अब क्या होगा?

आवंटन रद्द होने के बाद सभी कर्मचारियों को पीडब्ल्यूडी कॉलोनी खाली करनी होगी।

उनसे बकाया किराया वसूला जाएगा।

यदि कर्मचारी कॉलोनी खाली नहीं करते, तो जबरन निष्कासन की कार्रवाई हो सकती है।

भविष्य में सरकारी आवासों के आवंटन में सख्त नियम और निगरानी का पालन किया जाएगा।

यह कार्रवाई अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में प्रशासन का सख्त संदेश है, जिससे भविष्य में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर लगाम लगाई जा सके।

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