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बाराबंकी: स्कूल में सर्पदंश से छात्र की मौत, 24 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं; जांच रिपोर्ट का इंतजार
बाराबंकी। हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र के एक प्राथमिक विद्यालय में सर्पदंश से 8 वर्षीय छात्र की मौत के मामले में घटना के 24 घंटे बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है। वहीं, प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति भी अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं कर सकी है। इस बीच पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में मासूम का अंतिम संस्कार कराया गया। घटना को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
स्कूल में हुआ हादसा
आरोप है कि अंशू स्कूल परिसर के शौचालय गया था, जहां उसे जहरीले सांप ने डस लिया। अन्य बच्चों ने इसकी जानकारी शिक्षामित्र को दी, लेकिन परिजनों का आरोप है कि तत्काल गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई। बच्चे को दर्द से तड़पने के बाद एक बेंच पर लिटा दिया गया, जबकि परिवार को तुरंत सूचना नहीं दी गई।
परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
मृतक के परिजनों का आरोप है कि घटना सुबह करीब 11 बजे हुई, लेकिन इसकी जानकारी उन्हें लगभग ढाई घंटे बाद दी गई। सूचना मिलने पर परिजन बच्चे को सरकारी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने मौत का कारण सर्पदंश बताया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल के बाहर शव रखकर विरोध प्रदर्शन किया।
जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार
जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एडीएम न्यायिक, एएसपी दक्षिणी और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। हालांकि, घटना के 24 घंटे बाद भी समिति किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। मृतक के पिता द्वारा दी गई तहरीर पर भी अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
कोतवाली प्रभारी अनिल पांडेय ने बताया कि जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बीएसए नवीन पाठक ने कहा कि जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।
पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
मंगलवार को प्रशासन ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाकर गांव भेजा। इसके बाद गांव स्थित पैतृक बाग में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मासूम अंशू का अंतिम संस्कार कराया गया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
90 बच्चों की जिम्मेदारी एक शिक्षामित्र पर
जानकारी के अनुसार, देवगरपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक सुरेंद्र कुमार, सहायक अध्यापिकाएं मधु रावत और अनुराधा, तथा एक शिक्षामित्र अमिता सिंह तैनात हैं। घटना वाले दिन प्रधानाध्यापक ऑडिट कार्य से बाहर थे, जबकि दोनों सहायक अध्यापिकाएं अवकाश पर थीं। ऐसे में विद्यालय के करीब 90 बच्चों की जिम्मेदारी अकेले शिक्षामित्र पर थी।
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि यदि घटना के तुरंत बाद बच्चे के परिवार को सूचना देकर समय पर उपचार कराया जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। मामले में जांच पूरी होने के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
