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गुरु पूर्णिमा विशेष: 'हस्तिनापुर के वीर' के भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य ने साझा की गुरु-शिष्य परंपरा की सीख
मुंबई। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सोनी सब के पौराणिक धारावाहिक 'हस्तिनापुर के वीर' के कलाकार मनीष वाधवा और जीतेन लालवानी ने गुरु-शिष्य संबंध, अनुशासन और जीवन मूल्यों पर अपने विचार साझा किए। शो में दोनों कलाकार क्रमशः भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे हैं, जो युवा पांडवों और कौरवों के मार्गदर्शक के रूप में नजर आते हैं।
मनीष वाधवा ने कहा कि वह बच्चों को हमेशा अपने बचपन का आनंद लेने, काम के समय पूरी लगन से प्रदर्शन करने और सफलता या आलोचना से प्रभावित न होने की सलाह देते हैं। उनके अनुसार, अच्छे कमेंट्स अहंकार ला सकते हैं, जबकि नकारात्मक टिप्पणियां निराश कर सकती हैं। इसलिए कलाकारों को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और अपनी पहचान बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई कलाकार पूरी ईमानदारी और मेहनत से अपना सर्वश्रेष्ठ देता है, तो वही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि वह स्वयं भी नई पीढ़ी से लगातार सीखते रहते हैं।
वहीं, जीतेन लालवानी ने कहा कि बच्चे तब सबसे बेहतर सीखते हैं, जब वे अपने गुरु या वरिष्ठ के साथ सहज महसूस करते हैं। इसलिए वह पहले उनके मित्र बनने की कोशिश करते हैं और फिर अभिनय, अनुशासन तथा कार्य के प्रति समर्पण जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा करते हैं।
उन्होंने कहा कि मार्गदर्शन स्वाभाविक होना चाहिए और सीखने की प्रक्रिया दोनों तरफ से चलती है। उनके अनुसार, बाल कलाकार बेहद प्रतिभाशाली हैं और उनसे भी हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है।
'हस्तिनापुर के वीर' का प्रसारण सोनी सब पर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे किया जाता है।
