नई दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड में असम की झांकी ने जीता दर्शकों का दिल

गुवाहाटी। देशभर में 77वां गणतंत्र दिवस सोमवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया गया। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य गणतंत्र दिवस परेड में असम की झांकी ने अपनी समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक कला की मनमोहक प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। खास बात यह रही कि इस वर्ष परेड की शुरुआत असम की झांकी से हुई, जो राज्य के लिए गर्व का विषय बना।

असम की झांकी इस बार धुबड़ी जिले के आशारिकांदी क्षेत्र की प्रसिद्ध टेराकोटा कला पर आधारित थी। झांकी के आगे बढ़ते ही तीन बिहुवती कलाकारों ने पारंपरिक बिहू नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और असम की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

यह भी पढ़े - जनजातीय संस्कृति का उत्सव बनेगा ‘जात्रा–2026’, इंदौर में तीन दिन सजेगा परंपरा और पहचान का रंगीन संसार

परेड मार्ग से गुजरते समय असम की झांकी का राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित यूरोपीय संघ की नेता उर्सुला वॉन डेर लेएन और एंटोनियो कोस्टा ने तालियों के साथ अभिवादन किया।

झांकी में हीरामाटी (पवित्र मिट्टी) से निर्मित देवी-देवताओं की मूर्तियां, पारंपरिक सराई, बांस शिल्प और असम की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती मोरपंखी नाव को प्रदर्शित किया गया। इन सभी तत्वों ने राज्य की लोककला, आध्यात्मिक परंपरा और हस्तशिल्प कौशल को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया।

गौरतलब है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल रहीं, जिनमें 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और 13 केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों की झांकियां थीं। सभी झांकियां ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर आधारित थीं।

अपनी जीवंत और आकर्षक प्रस्तुति के माध्यम से असम की झांकी ने न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

खबरें और भी हैं

Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.