UP : श्वसन रोग चिकित्सा में उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को मिलेगा पद्मश्री

लखनऊ : पल्मोनरी मेडिसिन के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को श्वसन रोगों के उपचार, अनुसंधान और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। वह किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में रेस्पेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि रविवार सुबह उन्हें फोन के माध्यम से पद्मश्री के लिए नामित होने की सूचना मिली। यह खबर सुनते ही उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि डॉक्टर बनने के उनके पिता के सपने के साकार होने का प्रतीक है। उन्होंने इस सम्मान को अपने पिता को समर्पित किया।

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बस्ती जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने लगभग 45 वर्षों के लंबे चिकित्सकीय जीवन में हजारों मरीजों को नया जीवन दिया। साथ ही भारत में पल्मोनरी मेडिसिन को एक सशक्त और संगठित पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्हें देशभर में पल्मोनरी मेडिसिन के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

डॉ. प्रसाद ने केजीएमयू से एमबीबीएस (1974) और एमडी (1979) की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने रेस्पिरेटरी एवं ट्यूबरकुलोसिस चिकित्सा के क्षेत्र में विशेष कार्य किया। केजीएमयू में विभागाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने रेस्पेटरी मेडिसिन विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई और अनेक युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षित व मार्गदर्शन प्रदान किया।

अपने करियर के दौरान वे देश के कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शीर्ष पदों पर रहे। वह वल्लभभाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली के निदेशक तथा उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), सैफई के निदेशक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 जनवरी को होने वाले सम्मान समारोह में आमंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारी भी पहुंचे। उनके पद्मश्री सम्मान की घोषणा से केजीएमयू परिवार, चिकित्सा जगत और प्रदेशभर के चिकित्सकों में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय प्रशासन, सहकर्मियों और पूर्व छात्रों ने इसे न केवल डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, बल्कि पूरे चिकित्सा समुदाय के लिए गौरव का विषय बताया है।

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