Unnao Case: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को राहत देने वाला हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया

दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली बड़ी राहत पर रोक लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनकी आजीवन कारावास की सजा को निलंबित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हाईकोर्ट को नए सिरे से सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि सेंगर की दोषसिद्धि और उम्रकैद के खिलाफ दायर मुख्य अपील पर दो महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में मुख्य याचिका पर फैसला संभव न हो, तो ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले सजा निलंबन याचिका पर नया आदेश पारित किया जाए।

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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और हाईकोर्ट स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई कर सकता है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार करे कि क्या कोई विधायक पॉक्सो अधिनियम के तहत मुकदमे के दौरान “लोक सेवक” की श्रेणी में आता है या नहीं।

गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया था। हाईकोर्ट का कहना था कि पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(सी) के तहत “लोक सेवक” द्वारा गंभीर यौन उत्पीड़न का प्रावधान लागू किया गया था, जबकि निर्वाचित जनप्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत “लोक सेवक” की परिभाषा में नहीं आते।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि सेंगर सात वर्ष पांच माह से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, इसलिए अपील लंबित रहने तक उनकी सजा निलंबित की जा सकती है। हालांकि इस आदेश के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया था और पीड़िता, उसके परिवार तथा सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

बाद में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष 29 दिसंबर को ही हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और सेंगर की रिहाई पर रोक कायम रखी थी।

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