कक्षाओं से शुरू होगी पोषण की सही आदत, न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव में उठी मांग

नई दिल्ली। बच्चों में सही खानपान की आदत विकसित करने के लिए स्कूलों की भूमिका अहम मानी जा रही है। इसी विषय पर नई दिल्ली में आयोजित “नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन” के न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने जोर दिया कि पोषण शिक्षा को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही संतुलित आहार और पोषण के बारे में जागरूक किया जाए, तो कुपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एक ओर जहां कुपोषण की समस्या है, वहीं दूसरी ओर कम उम्र में मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं।

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भारत सरकार की पूर्व सचिव आरती आहूजा ने कहा कि खानपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के समन्वय की आवश्यकता है, ताकि इसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

वहीं, नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन की सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्चना सिन्हा ने कहा कि बच्चों की आदतों को आकार देने में स्कूल सबसे प्रभावी मंच हैं। उन्होंने कहा कि केवल पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों की आदतों में बदलाव लाना जरूरी है।

कॉन्क्लेव में सुझाव दिया गया कि गतिविधि आधारित शिक्षा, स्कूल कार्यक्रमों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बच्चों में स्वस्थ खानपान की आदत विकसित की जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कक्षाओं से ही पोषण संबंधी सही शिक्षा दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी अधिक स्वस्थ और जागरूक बन सकेगी।

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