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बंधुआ और बाल श्रम मुक्त मध्यप्रदेश बनाना लक्ष्य: श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल
भोपाल। मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मध्यप्रदेश को पूरी तरह बंधुआ और बाल श्रम मुक्त बनाना है। इसके लिए ठोस रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसके पाँच प्रमुख स्तंभ होंगे—कानूनी सहायता, पुनर्वास, कौशल विकास, जनजागरूकता और प्रशासनिक संवेदनशीलता।
पटेल ने कहा कि बंधुआ मजदूरी की स्पष्ट परिभाषा तय करना कठिन है, लेकिन यह निश्चित किया जा सकता है कि किन परिस्थितियों में श्रमिक बंधुआ बनता है। उन्होंने प्रवासी मजदूरी, अशिक्षा, कानून की जानकारी का अभाव, नशे की लत, मानसिक कमजोरी और पारंपरिक पेशों से जुड़ी मजबूरियों को बंधुआ श्रम के प्रमुख कारण बताया।
उन्होंने कहा कि बारूद से जुड़े कारखानों को राज्य में अति-खतरनाक श्रेणी में रखा गया है और उद्योगों का वर्गीकरण खतरनाक व अति-खतरनाक श्रेणियों में किया जाना चाहिए, ताकि श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। मंत्री ने कहा कि लक्ष्य यह होना चाहिए कि आने वाले समय में यह कहा जा सके कि मध्यप्रदेश में न कोई बाल मजदूर है और न कोई बंधुआ मजदूर।
कार्यक्रम में श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में श्रम कानूनों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के साथ रोजगार और कार्यबल में बड़े परिवर्तन होंगे, ऐसे में जोखिमों को कम करने के लिए प्रभावी नियमों की आवश्यकता है।
कार्यशाला में श्रम विभाग द्वारा तीन संस्थानों को श्रम स्टार रेटिंग के तहत सम्मानित किया गया। श्रमायुक्त तन्वी हुड्डा ने स्वागत भाषण दिया। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 और राज्य कार्य योजना पर आधारित प्रस्तुति यूनिसेफ भोपाल की ओर से दी गई।
कार्यशाला में चार नवीन श्रम संहिताओं पर प्रस्तुतीकरण, समूह चर्चा और शंका समाधान सत्र आयोजित किए गए, जिसमें विभिन्न जिलों के श्रम अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक संगठन, यूनियन और गैर-सरकारी संगठनों के लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस अवसर पर बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम के अंतर्गत राज्य कार्य योजना का विमोचन भी किया गया।
