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भारत को AI का उपभोक्ता नहीं, स्वामी बनना होगा : जीत अदाणी
2035 तक 8.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश से ग्रीन AI इंफ्रास्ट्रक्चर का रोडमैप
नई दिल्ली, फरवरी 2026: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में भारत को केवल तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि उसे विकसित करने और नियंत्रित करने वाला राष्ट्र बनना होगा। यह स्पष्ट संदेश अदाणी ग्रुप के डायरेक्टर जीत अदाणी ने इंडिया AI समिट 2026 के मंच से दिया। उन्होंने कहा कि AI अब सिर्फ एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता, आर्थिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का नया आधार बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इतिहास में हर युग किसी न किसी तकनीक से परिभाषित हुआ है—
बिजली ने उद्योगों को गति दी,
तेल ने वैश्विक राजनीति की दिशा तय की,
इंटरनेट ने अर्थव्यवस्था को बदला—
और अब वही भूमिका AI निभाने जा रहा है।
जीत अदाणी ने स्पष्ट किया कि भारत के सामने असली सवाल यह नहीं है कि वह AI अपनाएगा या नहीं, बल्कि यह है कि भारत अपनी बुद्धिमत्ता खुद विकसित करेगा या दूसरों की बनाई प्रणालियों पर निर्भर रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का वैश्विक उदय किसी पर प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया में संतुलन और स्थिरता लाने के लिए है। भारत जब तकनीक बनाता है तो उसका उद्देश्य नियंत्रण नहीं, बल्कि समावेश होता है। हालांकि उन्होंने चेताया कि क्षमता के बिना समावेश कमजोरी बन जाता है और संप्रभुता के बिना क्षमता विदेशी निर्भरता में बदल जाती है।
भारत की AI शक्ति के तीन स्तंभ
जीत अदाणी ने भारत के AI भविष्य को तीन मजबूत स्तंभों पर आधारित बताया—
1. सम्पूर्ण ऊर्जा सुरक्षा
उन्होंने कहा कि AI सिस्टम भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत करते हैं। यदि ऊर्जा ढांचा कमजोर होगा तो AI क्षमता भी सीमित रह जाएगी। इसलिए सोलर और विंड एनर्जी का विस्तार अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति बन चुका है। आने वाले समय में भारत में ऐसे बड़े केंद्र विकसित होंगे, जहां ग्रीन एनर्जी और AI डेटा सेंटर एक साथ कार्य करेंगे।
2. क्लाउड और डेटा पर संप्रभुता
उन्होंने कहा कि जिस तरह पहले सैन्य सुरक्षा के लिए सेना और नौसेना जरूरी थीं, आज के डिजिटल युग में डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर उतने ही अहम हो गए हैं। यदि भारत का डेटा और AI सिस्टम विदेशों में संचालित होंगे, तो उसकी रणनीतिक ताकत भी बाहरी नियंत्रण में चली जाएगी। इसलिए भारत को अपने देश में ही बड़े पैमाने पर AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा।
3. सेवाओं की संप्रभुता
जीत अदाणी ने कहा कि IT क्रांति के दौरान भारत ने दुनिया को सेवाएं दीं, लेकिन आर्थिक लाभ का बड़ा हिस्सा विदेशों में गया। AI भारत को इस स्थिति को बदलने का ऐतिहासिक अवसर दे रहा है। भारत का AI किसानों की मदद करे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए, लॉजिस्टिक्स और उद्योग को सक्षम करे और छोटे शहरों व गांवों तक विकास पहुंचाए—यही इसका उद्देश्य होना चाहिए।
अपने संबोधन में भावनात्मक स्वर अपनाते हुए जीत अदाणी ने कहा,
“हमारी पीढ़ी को आज़ादी विरासत में मिली है, लेकिन अब उसे मजबूत और सुरक्षित बनाना हमारी जिम्मेदारी है। आधुनिक राष्ट्रवाद सिर्फ विचार नहीं, बल्कि क्षमता, मजबूती और क्रियान्वयन से परिभाषित होता है।”
अपने वक्तव्य के अंत में उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाली AI सदी भारत की पहचान के साथ जुड़ी होगी।
उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव का केवल हिस्सा नहीं बनेगा, बल्कि उसका नेतृत्व करेगा। भारत का लक्ष्य दुनिया को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसे स्थिरता देना और ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो पूरी मानवता के लिए उपयोगी हो।
