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मुंद्रा पोर्ट से भारत की क्रूड लॉजिस्टिक्स में ऐतिहासिक छलांग
भारत के समुद्री और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ने साल के शुरुआत में ही एक निर्णायक उपलब्धि दर्ज की है, जब मुंद्रा पोर्ट पर देश का पहला पूरी तरह लदा हुआ वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (वीएलसीसी) सीधे जेटी पर आया। एमटी न्यू रिनाउन नाम का यह विशाल टैंकर करीब 3.3 लाख क्यूबिक मीटर कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पहुंचा और इसके साथ ही भारत पहली बार ऐसी क्षमता वाले पोर्ट कीग्लोबल लिस्ट में शामिल हो गया, जहां फुली लोडेड वीएलसीसी को सीधे जेटी पर संभाला जा सकता है।
मुंद्रा का यह वीएलसीसी जेटी दुनिया के उन चुनिंदा पोर्ट्स में शामिल हो गया है, जहां इतनी गहराई और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है कि 21.6 मीटर ड्राफ्ट और 3,60,000 मीट्रिक टन तक के अधिकतम डिस्प्लेसमेंट वाले जहाजों को सीधे जेटी पर लगाया जा सके। 400 मीटर लंबी इस जेटी की बर्थ पॉकेट गहराई 25 मीटर है और यह 333 मीटर लंबाई वाले जहाजों को संभालने में सक्षम है। यहां लगाए गए दो 20-इंच के क्रूड ऑयल लोडिंग आर्म प्रति घंटे 10,000 से 12,000 क्यूबिक मीटर तक कच्चे तेल का डिस्चार्ज कर सकते हैं। उन्नत फेंडर सिस्टम, चार ब्रेस्टिंग डॉल्फिन और छह मूरिंग डॉल्फिन, जिनमें 150 टन एसडब्ल्यूएल क्षमता वाले हुक्स लगे हैं, इस जेटी को अल्ट्रा-लार्ज जहाजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाते हैं।
रणनीतिक तौर से यह उपलब्धि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए भी बेहद अहम है। मुंद्रा का वीएलसीसी जेटी लगभग 489 किलोमीटर लंबी कच्चे तेल की पाइपलाइन के जरिए एचपीसीएल की राजस्थान स्थित बाड़मेर रिफाइनरी से सीधे जुड़ा हुआ है, जिसे देश की सबसे महत्वपूर्ण रिफाइनिंग परिसंपत्तियों में गिना जाता है। इस सीधी कनेक्टिविटी से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात में दक्षता बढ़ेगी, सप्लाई चेन अधिक मजबूत बनेगी और गुजरात व राजस्थान जैसे राज्यों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
अदाणी का मुंद्रा पोर्ट पहले ही भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है। कच्छ की खाड़ी में स्थित यह डीप-वॉटर, ऑल-वेदर पोर्ट उत्तर और पश्चिम भारत के लिए एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है। यहां 27 ऑपरेशनल बर्थ और दो सिंगल पॉइंट मूरिंग हैं, और यह ड्राई बल्क, ब्रेक-बल्क, प्रोजेक्ट कार्गो, लिक्विड्स, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और क्रूड ऑयल जैसे विविध कार्गो को संभालने में सक्षम है। मुंद्रा केप साइज, वीएलसीसी, यूएलसीसी और अल्ट्रा लार्ज कंटेनर वेसल्स को भी आसानी से हैंडल करता है।
वित्त वर्ष 2024-25 में मुंद्रा भारत का पहला ऐसा पोर्ट बना, जिसने एक ही साल में 200 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कार्गो हैंडल किया। इसके अलावा, वर्ल्ड बैंक के कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स में 2024 और 2025 के लिए मिली मान्यता ने इसकी वैश्विक साख को और मजबूत किया है।
