बॉलीवुड के बड़े सितारे भी बने डिजिटल स्कैम का शिकार, शोहरत भी नहीं बचा सकी ठगी से

मुंबई, अक्टूबर 2026: फिल्मों और वेब सीरीज में दिखाए जाने वाले साइबर और वित्तीय स्कैम दर्शकों को हमेशा आकर्षित करते रहे हैं। जामताड़ा: सबका नंबर आएगा में फोन के जरिए होने वाली ठगी से लेकर स्कैम 1992: द हर्षद मेहता स्टोरी में बड़े वित्तीय घोटाले तक, मनोरंजन जगत ने धोखाधड़ी के कई रूप पर्दे पर दिखाए हैं। लेकिन जब इसी तरह की घटनाएं असल जिंदगी में बॉलीवुड सितारों और लोकप्रिय चेहरों के साथ होती हैं, तो यह महज मनोरंजन नहीं बल्कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी बन जाती हैं।

कीर्ति कुल्हारी के कार्ड से 2.43 लाख रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन

हाल ही में अभिनेत्री कीर्ति कुल्हारी ने अपने क्रेडिट कार्ड से 2.43 लाख रुपये के कथित अनधिकृत अंतरराष्ट्रीय लेनदेन का मामला साझा किया। हिंदुस्तान टाइम्स को अगस्त 2026 में दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान उन्हें अपने कार्ड से डॉलर में भुगतान होने का नोटिफिकेशन मिला।

उन्होंने डिजिटल दौर में मोबाइल फोन पर निजी जिंदगी से जुड़ी बड़ी मात्रा में जानकारी मौजूद होने की बात कही और बताया कि ऐसे माहौल में धोखाधड़ी को पहचानना हमेशा आसान नहीं होता।

अंकुश बहुगुणा हुए डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार

कंटेंट क्रिएटर अंकुश बहुगुणा ने जनवरी 2025 में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का अपना अनुभव साझा किया था। उनके अनुसार, ठगों ने उन्हें करीब 40 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा। इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के आर्थिक नुकसान के साथ-साथ उसके मानसिक प्रभाव को भी सामने रखा।

पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी बताई मुश्किल

टेलीविजन कलाकार पूजा बनर्जी और कुणाल वर्मा ने भी एक वित्तीय धोखाधड़ी में अपनी बचत गंवाने की बात साझा की थी। पूजा ने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि दो-तीन महीने उनके परिवार के लिए बेहद कठिन रहे और उन्हें आगे की स्थिति को लेकर काफी चिंता थी।

वहीं, टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर ने कथित तौर पर एक अनजान व्यक्ति के फोन कॉल के बाद 85 हजार रुपये गंवाने की जानकारी दी थी। एबीपी लाइव के अनुसार, उनका दावा था कि उन्होंने अपना ओटीपी या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा नहीं किया था।

पर्दे पर दिखने वाले स्कैम, असल जिंदगी में बड़ा सबक

जामताड़ा, स्कैम 1992 और स्कैम 2003: द टेल्गी स्टोरी जैसी वेब सीरीज ने ठगी और वित्तीय अपराधों के अलग-अलग तरीकों को पर्दे पर दिखाया है। लेकिन असल जिंदगी में साइबर ठगी किसी स्क्रिप्ट के मुताबिक नहीं होती। कभी एक फोन कॉल, कभी अनजान ट्रांजैक्शन, तो कभी भरोसे का फायदा उठाकर ठग लोगों को अपना शिकार बना लेते हैं।

अक्टूबर को साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में मनोरंजन जगत से सामने आए ये मामले यह याद दिलाते हैं कि डिजिटल धोखाधड़ी किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। बड़े सितारे, कारोबारी या आम नागरिक—कोई भी इसका शिकार बन सकता है।

डिजिटल लेनदेन के दौरान सतर्क रहना, अनजान लिंक या कॉल से सावधान रहना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देना साइबर ठगी से बचाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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