धर्म का मुद्दा आगे

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में धर्म का मुद्दा आगे हो गया है। भाजपा ने अपने दस साल के कार्यकाल के दौरान अधिकतर विकास, 5वीं से तीसरी वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतत: 2047 तक ‘विकसित भारत’ की बात कही। 2024 का जनादेश ‘विकसित भारत’ का संकल्प हासिल करने की रूपरेखा तैयार करने के लिए मांगा जा रहा है। 

सवाल उठ रहे हैं कि अचानक यह बदलाव क्यों आया कि प्रथम चरण के कम मतदान के बाद प्रधानमंत्री के तेवर बदल गए। विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजस्थान में विभाजनकारी और अपमानजनक भाषण देने का आरोप लगाया। हालांकि भाजपा अब भी दौड़ में सबसे आगे है। कई सीटों पर मुकाबले कांटेदार हैं। परंतु मतदान अब भी कम हो सकता है, क्योंकि दूसरे चरण की जिन 89 सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होना है, उसमें कमोबेश 30 सीटों पर लू का मौसम होगा। 

पहले चरण के तहत 19 अप्रैल को 21 राज्यों की 102 सीटों पर वोटिंग हुई थी और करीब 65.5 प्रतिशत मतदान हुआ था। दूसरे चरण में प्रचार के दौरान बाकी सब मुद्दे पीछे छोड़ते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उस पर तुष्टिकरण करने का आरोप लगा दिया। 

गुरुवार को चुनाव आयोग ने किसी प्रधानमंत्री के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप पर पहली बार संज्ञान लेते हुए भाजपा से विपक्षी दलों द्वारा दायर शिकायतों का जवाब देने को कहा है। चुनाव आयोग ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को जारी नोटिस का 29 अप्रैल तक जवाब देने का निर्देश जारी किया है। आयोग ने इसी तरह का एक पत्र कांग्रेस अध्यक्ष को भी लिखा है जो उनके और राहुल गांधी के खिलाफ बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित है। 

चुनाव आयोग को अपनी शिकायत में कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में आरोप लगाया था कि कांग्रेस लोगों की संपत्ति को मुसलमानों में फिर से बांटना चाहती है और विपक्षी दल महिलाओं के ‘मंगलसूत्र’ को भी नहीं बख्शेगा। महत्वपूर्ण है कि चुनाव आयोग ने स्टार प्रचारकों पर लगाम लगाने के पहले कदम के तहत पार्टी अध्यक्षों को जिम्मेदार ठहराने के लिए जनप्रतिनिधि कानून के प्रावधानों का इस्तेमाल किया है। 

गौरतलब है कि 2019 के आम चुनाव के दौरान भी प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ छह शिकायतें दर्ज की गई थीं, लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें ‘क्लीन चिट’ दे दी। इस पर चुनाव आयोग की तीखी आलोचना की गई थी। हालांकि मतदान और मतदाता से जुड़े ‘भारतीय जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951’ में ऐसी धाराएं भी हैं, जिनके तहत ऐसी शिकायतों पर दंडनीय कार्रवाई की जा सकती है। आयोग की यह कार्यवाही उसकी  निष्पक्षता और विश्वसनीयता से जुड़ी है।

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