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सुरक्षा चुनौतियों के बीच
बदलती भौगोलिक-राजनीतिक स्थिति और सुरक्षा परिदृश्य ने भारत को सैन्य आधुनिकीकरण में तेजी लाने के लिए प्रेरित किया है। भारत रक्षा उपकरणों के स्वदेशीकरण की कोशिश कर रहा है। मंगलवार को भारत ने ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया। इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित किया है।
चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश पांचवीं पीढ़ी के युद्ध की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में भारत के पास एक समग्र सुरक्षा रणनीति होनी चाहिए। इस बीच आई एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्वोच्च स्तर पर रणनीतिक योजना तैयार करने वाली सरकार की संस्था राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससी) ने देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (एनएसएस) तैयार करनी शुरू कर दी है। वास्तव में बदलते रणनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यह निर्णय स्वागत योग्य है।
हालांकि एनएससी 1999 से अस्तित्व में है। लेकिन एनएसएस के निर्माण की पहल सैन्य और रणनीतिक समुदाय में वर्षों की चर्चा के उपरांत हो रही है। जबकि सन 1999 में कारगिल समीक्षा समिति और 2001 में एक मंत्री समूह ने भी इस विषय में अनुशंसा की थी। इससे पहले एनएसएस के गठन की कोशिश नहीं हो पाई। इस स्थिति के लिए कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर देश में कोई राजनीतिक सहमति नहीं है। पाकिस्तान और चीन से मिलने वाली चुनौतियों से कैसे निपटा जाए, इस पर कोई आम सहमति नहीं है।
अमेरिका, रूस और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन के अधिकांश देशों ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति प्रकाशित की हैं। चीन में भी एक औपचारिक नीति है जिसका नाम व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा है। पाकिस्तान ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति तैयार की जो उसके राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करती है। समझा जाना चाहिए कि दुनिया तेजी से बदल रही है। नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा हुई हैं। सुसंगत रणनीति के अभाव में सरकार की प्रतिक्रियाएं तदर्थ और आंशिक रहेंगी। इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
