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उत्तर प्रदेश में अपराधियों का प्रभाव, जांच को किया जा रहा प्रभावित: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बुधवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों का प्रभाव बढ़ गया है और ऐसे लोग न केवल आरोप लगाते हैं, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन दो व्यक्तियों के कथित यौन शोषण के मामले में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उनसे उनका कोई संपर्क नहीं रहा है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “पुलिस जो भी जांच कर रही है, उसकी जानकारी आशुतोष पांडे तक कैसे पहुंच रही है? यह किस तरह की जांच है?” संत ने कथित स्क्रीनशॉट दिखाते हुए दावा किया कि ग्रुप में एक संदेश में यह उल्लेख किया गया है कि आशुतोष पांडे ने जांच के दौरान सबूत जुटाने में पुलिस की मदद की और तीन दिनों तक जांच दल के साथ मौजूद रहे।
प्रयागराज में तैनात एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के साथ आशुतोष पांडे की तस्वीर को लेकर उठे सवालों पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यही तस्वीर जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की गई थी और इसे फेसबुक पर भी पोस्ट किया गया था। उन्होंने कहा, “यह वही तस्वीर है, जिसे हमने मीडिया को दिखाया था।”
उन्होंने दावा किया कि देशभर के साधु-संत इस घटनाक्रम से चिंतित हैं। उन्होंने कहा, “आज देश के साधु और संत भय और चिंता में हैं। जब आपराधिक पृष्ठभूमि वाला व्यक्ति शंकराचार्य पर आरोप लगा सकता है, तो बाकी संतों की क्या स्थिति होगी?”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी आरोप लगाया कि प्राथमिकी में नामजद दोनों पीड़ित लंबे समय से आशुतोष पांडे के साथ रह रहे थे। उन्होंने कहा, “यदि उन बच्चों के साथ कुछ भी गलत हुआ है, तो यह उन्हीं लोगों द्वारा किया गया होगा जो उनके साथ थे। हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं था।” उन्होंने यह भी कहा कि “यदि कोई कहानी गढ़ना चाहता है, तो वह कुछ भी बना सकता है।”
इस बीच, प्रयागराज में आशुतोष पांडे ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास इस मामले में पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश पुलिस पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं और कांग्रेस शासित राज्यों की पुलिस से जांच कराने की मांग कर रहे हैं।
पांडे ने कहा, “हमारे पास उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। दुनिया की सबसे सक्षम पुलिस भी जांच करे, तो उन्हें बचा नहीं पाएगी।”
गौरतलब है कि प्रयागराज में 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पिछले एक वर्ष में एक गुरुकुल और धार्मिक सभाओं के दौरान एक नाबालिग सहित दो व्यक्तियों के कथित यौन शोषण के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के कुछ दिन बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि वह अपनी गिरफ्तारी का विरोध नहीं करेंगे और दावा किया था कि “मनगढ़ंत कहानी” का सच सामने आएगा।
