उमाशंकर सिंह की 2017 में समाप्त हो चुकी थी विधानसभा सदस्यता, लोकायुक्त की रिपोर्ट पर राज्यपाल ने की थी कार्रवाई

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह, जिनके आवास पर बुधवार को आयकर विभाग ने छापेमारी की, इससे पहले भी विवादों में रहे हैं। उनकी विधानसभा सदस्यता वर्ष 2017 में समाप्त कर दी गई थी। वह उत्तर प्रदेश के ऐसे एकमात्र विधायक रहे हैं, जिनकी सदस्यता निर्वाचन की तिथि से ही निरस्त की गई थी।

उमाशंकर सिंह पहली बार वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। इसके बाद 18 दिसंबर 2013 को अधिवक्ता सुभाष चंद्र द्वारा उनके खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विधायक बनने के बाद भी उमाशंकर सिंह सरकारी ठेके लेकर सड़क निर्माण कार्य कर रहे हैं।

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तत्कालीन लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन.के. मेहरोत्रा ने मामले की जांच के बाद उमाशंकर सिंह को दोषी ठहराते हुए अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। इसके आधार पर तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने जनवरी 2017 में आदेश जारी कर उमाशंकर सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी थी। आदेश में उनकी सदस्यता को निर्वाचित होने की तिथि छह मार्च 2012 से ही निरस्त माना गया था।

बसपा नेतृत्व के रहे हैं करीबी

विधानसभा चुनाव 2022 में उमाशंकर सिंह बसपा के इकलौते विधायक चुने गए थे, जिससे विधानसभा में पार्टी का खाता खुला। इसके बाद बसपा प्रमुख मायावती के साथ उनकी निकटता की चर्चा रही। बताया जाता है कि उनकी तबीयत खराब होने की सूचना मिलने पर मायावती स्वयं उनसे मिलने उनके आवास पर गई थीं।

आयकर छापे की पृष्ठभूमि

सूत्रों के अनुसार, उमाशंकर सिंह के यहां हुई आयकर विभाग की कार्रवाई की पृष्ठभूमि करीब 11 महीने पहले तैयार हो चुकी थी। विजिलेंस विभाग को उनके, उनकी पत्नी और बच्चों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिली थी। गोपनीय जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद मामला आयकर विभाग को भेजा गया, जिसके बाद छापेमारी की कार्रवाई की गई।

विवादों से रहा है नाता

उमाशंकर सिंह का नाम पूर्व में भी कई विवादों से जुड़ चुका है। पिछले वर्ष बलिया में एक पुल को खोले जाने के मामले को लेकर लोक निर्माण विभाग और राजनीतिक बयानबाजी के बीच उनका नाम चर्चा में आया था। इसके अलावा सड़क निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी उन पर आरोप लगते रहे हैं।

राजनीतिक सफर

उमाशंकर सिंह ने वर्ष 1990 में छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वर्ष 2000 में वह बलिया के जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इसके बाद वर्ष 2011 में बसपा में शामिल हुए और 2012, 2017 तथा 2022 में बसपा के टिकट पर विधायक निर्वाचित हुए।

मंत्री की प्रतिक्रिया

उमाशंकर सिंह, योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के समधी हैं। आयकर छापे को लेकर मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उमाशंकर सिंह पिछले दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और उनके अधिकांश व्यवसाय बंद हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए संवेदनशीलता बरतने की अपील की।

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