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Basant Panchami 2026 : देशभर में बसंत पंचमी की धूम, 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा व संगम में लगाई आस्था की डुबकी
प्रयागराज : माघ मेले के दौरान बसंत पंचमी स्नान पर्व पर प्रयागराज में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे तक करीब 2.10 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में पवित्र स्नान किया। प्रयागराज मेला प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार रात 12 बजे से ही संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था, जो शुक्रवार दोपहर तक लगातार जारी रहा।
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तीर्थ पुरोहित राजेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम के कारण बसंत पंचमी स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीली वस्तुओं के दान का विधान है। बसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन का भी आभास होता है और लोग इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं।
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि माघ मेला 800 हेक्टेयर क्षेत्र में सात सेक्टरों में आयोजित किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में 25 हजार से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। अल्प अवधि के कल्पवासियों के लिए टेंट सिटी की व्यवस्था की गई है, जहां ध्यान और योग की सुविधाएं उपलब्ध हैं। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए बाइक टैक्सी और गोल्फ कार्ट की सुविधा भी दी गई है।
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पुलिस अधीक्षक (माघ मेला) नीरज पांडेय ने बताया कि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए 42 अस्थायी पार्किंग स्थल बनाए गए हैं, जिनमें करीब एक लाख से अधिक वाहन खड़े किए जा सकते हैं। माघ मेला 2025-26 के दौरान 12,100 फुट लंबे घाटों का निर्माण किया गया है, जिन पर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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सेमराधनाथ घाट पर भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भदोही जिले के सेमराधनाथ गंगा घाट पर भी बसंत पंचमी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त की। गुरुवार अर्धरात्रि के बाद से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था, जो शुक्रवार दोपहर तक जारी रहा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रद्धालुओं ने स्नान-ध्यान कर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
प्रमुख ज्योतिषाचार्य पंडित मिथिलेश उपाध्याय ने बताया कि माघ मास की बसंत पंचमी पर किया गया स्नान ‘अमृत स्नान’ माना जाता है। इस दिन स्नान करने से पापों का नाश, आध्यात्मिक शुद्धि तथा ज्ञान, सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मां सरस्वती की कृपा से बुद्धि और विवेक का विकास होता है। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी का स्नान न केवल शारीरिक बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी महत्वपूर्ण माध्यम है और यह मोक्ष व पितरों की शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।
