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सॉफ्टवेयर इंजीनियर मौत मामला: बड़ा एक्शन, लोटस ग्रीन–विजटाउन समेत पांच बिल्डरों पर पर्यावरण उल्लंघन का केस, दूसरी FIR दर्ज
नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में जलभराव वाले एक बड़े गड्ढे को लेकर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोप में पांच बिल्डरों के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसी गड्ढे में गिरने से 16 जनवरी को सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उधर, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच तीसरे दिन भी जारी रही।
शिकायत में बताया गया कि 20 जनवरी को गश्त के दौरान सेक्टर-150 स्थित भूखंड संख्या एससी-020/ए-3 पर एक अत्यंत बड़ा गड्ढा मिला, जिसमें कई वर्षों से पानी भरा हुआ था। पानी प्रदूषित होकर कीचड़ जैसा हो चुका था, जिससे वायु प्रदूषण फैल रहा था और आसपास की सुरक्षा व स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। गड्ढे के चारों ओर कोई सुरक्षा व्यवस्था या चेतावनी संकेतक नहीं लगाए गए थे, जबकि यह सड़क के बेहद नजदीक स्थित है।
जांच में सामने आया कि उक्त भूखंड वर्ष 2024 में ‘लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड’ को आवंटित किया गया था, जबकि 2020 में इसे ‘विजटाउन’ ने खरीदा था। वर्तमान में भी संपत्ति का कुछ हिस्सा लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन के अधीन है। ग्रेटर नोएडा के सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने बताया कि पांचों बिल्डरों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
इससे पहले, सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के पिता की शिकायत पर 18 जनवरी को ‘एमजेड विजटाउन प्लानर्स’ और ‘लोटस ग्रीन्स’ के खिलाफ लापरवाही, गैर-इरादतन हत्या और जान को खतरे में डालने से संबंधित धाराओं में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, SIT ने नोएडा प्राधिकरण के सिविल, परियोजना और यातायात प्रकोष्ठ समेत विभिन्न विभागों से सेक्टर-150 में कराए गए कार्यों का विस्तृत ब्योरा मांगा है, खासतौर पर उस स्थान के आसपास हुए कार्यों का जहां हादसा हुआ।
SIT प्रमुख एडीजी (मेरठ जोन) भानु भास्कर ने निरीक्षण के पहले दिन कहा था कि तीन सदस्यीय टीम को शनिवार तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं, पुलिस ने मंगलवार को ‘एमजेड विजटाउन प्लानर्स’ के निदेशक अभय कुमार को गिरफ्तार कर बुधवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
