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Atal Pension Yojana: मोदी मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला, 2030-31 तक जारी रहेगी अटल पेंशन योजना
दिल्ली : केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों को बड़ी राहत देते हुए अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को वित्त वर्ष 2030-31 तक जारी रखने को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। इसके साथ ही योजना के प्रचार-प्रसार, क्षमता निर्माण, विकासात्मक गतिविधियों और ‘गैप फंडिंग’ के लिए वित्तीय सहायता को भी अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की स्वीकृति दी गई है।
विज्ञप्ति के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 तक एपीवाई के तहत 8.66 करोड़ से अधिक सदस्य पंजीकृत हो चुके हैं। योजना के अंतर्गत अंशदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति माह तक की न्यूनतम पेंशन की गारंटी दी जाती है।
MSME सेक्टर को मजबूती: SIDBI को मिलेगी 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) को 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। यह निवेश वित्तीय सेवा विभाग द्वारा तीन चरणों में किया जाएगा।
सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 3,000 करोड़ रुपये का निवेश 31 मार्च 2025 की बुक वैल्यू पर प्रति शेयर 568.65 रुपये की दर से किया जाएगा।
इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 में क्रमशः 1,000-1,000 करोड़ रुपये का निवेश संबंधित पूर्ववर्ती वर्ष की 31 मार्च की बुक वैल्यू पर किया जाएगा।
इस 5,000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता के बाद वित्तीय मदद पाने वाले एमएसएमई की संख्या वित्त वर्ष 2025 के अंत में 76.26 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2028 के अंत तक 102 लाख होने की संभावना है। यानी लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ेंगे।
एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार (30 सितंबर 2025 तक), देश में 6.90 करोड़ एमएसएमई हैं, जो कुल 30.16 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं। औसतन प्रति एमएसएमई 4.37 लोगों को रोजगार मिलता है। इस आधार पर अनुमान है कि नए एमएसएमई जुड़ने से वित्त वर्ष 2027-28 तक करीब 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित होंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशित ऋण और आगामी वर्षों में पोर्टफोलियो विस्तार के चलते सिडबी की बैलेंस शीट पर जोखिम में फंसे कर्ज में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में पूंजी पर्याप्तता अनुपात (सीआरएआर) को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी, जिसे यह इक्विटी सहायता पूरा करेगी।
