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क्रिटिकल मिनरल्स में भारत की अग्रणी भूमिका को झारखंड ने किया मजबूत
रांची। ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच झारखंड ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में अपनी रणनीतिक क्षमताओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य प्रतिनिधिमंडल ने क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर एक उच्चस्तरीय वैश्विक संवाद आयोजित कर अंतरराष्ट्रीय मंच पर झारखंड की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
इस उपलब्धता ने झारखंड को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक सुरक्षा और भू-आर्थिक रणनीति का एक अहम स्तंभ बना दिया है। प्रतिभागियों ने स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और भविष्य की तकनीकों के विकास में झारखंड की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि झारखंड की रणनीति केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुसंधान एवं विकास, मिनरल प्रोसेसिंग, उन्नत विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसी दिशा में राज्य सरकार एक व्यापक मिनरल प्रोसेसिंग नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें निवेश प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता और मूल्य श्रृंखला के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। यह पहल यूके–भारत एफटीए, भारत–जर्मनी सहयोग और यूके–भारत व्यापार एवं सुरक्षा जैसे अंतरराष्ट्रीय ढांचों के अनुरूप है।
राउंड टेबल चर्चा में जिम्मेदार खनन, टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला और तकनीक आधारित मूल्य संवर्धन की आवश्यकता पर भी सहमति बनी। झारखंड की “प्रकृति के साथ विकास” की विकास दृष्टि ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
इस अवसर पर “बैनेट द ग्राउंड: पावरिंग इंडिया एनर्जी सिक्योरिटी” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जिसमें झारखंड की भूवैज्ञानिक समृद्धि और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाया गया है।
