लोक कला और संस्कृति का संरक्षण सभी की जिम्मेदारी : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल ने कहा है कि आधुनिकता और तकनीकी बदलाव के दौर में लोक संगीत, लोक नृत्य और लोक परंपराओं को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहने दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि संस्कृति किसी भी समाज की पहचान और अस्तित्व का आधार होती है, इसलिए इसके संरक्षण को जन-जन का दायित्व बनाना होगा।

राज्यपाल का यह संदेश उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान समारोह-2026 के अवसर पर पढ़कर सुनाया गया। जन भवन स्थित गांधी सभागार में आयोजित समारोह में वर्ष 2021 से 2024 तक के लिए चयनित 51 कलाकारों को संगीत, नृत्य, नाटक और लोककलाओं के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

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अपने संदेश में राज्यपाल ने कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान का सशक्त साधन है। लोकगीत, लोकनाट्य और लोकसंगीत किसी भी सभ्यता की आत्मा होते हैं और इन्हीं के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जीवित रहती है।

उन्होंने कहा कि तकनीकी क्रांति और बदलती जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी का रुझान तेजी से बदल रहा है, जिससे लोक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समय में उन कलाकारों का सम्मान आवश्यक है, जो अपनी साधना और समर्पण से इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं।

राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी ने लोक संगीत और लोकनाट्य से जुड़े 5,500 घंटे से अधिक के दुर्लभ ऑडियो-वीडियो दस्तावेज संरक्षित किए हैं। इसके अलावा कत्थक, नाट्य कला और विभिन्न लोक विधाओं के संवर्धन के लिए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

समारोह में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि लोक कलाकार देश की सनातन सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं और सरकार उनके संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ज्ञान, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्यों की वैश्विक धरोहर है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में लोक कलाकारों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान भी किया।

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