Lucknow News : स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर बड़ा विवाद, उपभोक्ता परिषद ने CBI जांच की उठाई मांग

लखनऊ : उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पावर कॉरपोरेशन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी की जा रही है। परिषद का आरोप है कि भारत सरकार द्वारा समाप्त की जा चुकी अधिसूचना के आधार पर आज भी नए बिजली कनेक्शनों पर प्रीपेड मोड की अनिवार्यता लागू की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ बड़ा धोखा हो रहा है।

परिषद ने पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है। साथ ही कहा है कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री स्मार्ट प्रीपेड मीटर को आधुनिक तकनीक बताकर उपभोक्ताओं को जागरूक करने की बात कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार की नई अधिसूचना के बावजूद पुरानी व्यवस्था लागू रहने पर मौन साधे हुए हैं।

यह भी पढ़े - Lucknow News : एसबीआई लाइफ की ‘थैंक्स ए डॉट’ पहल से कॉलेज छात्रों में बढ़ी ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मीडिया के सामने पावर कॉरपोरेशन का वह आदेश सार्वजनिक किया, जिसमें 10 सितंबर 2025 से पूरे प्रदेश में नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में अनिवार्य किए जाने की बात कही गई थी।

बताया गया कि इसे भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की 28 फरवरी 2022 की अधिसूचना के आधार पर उचित ठहराया गया था।

परिषद के अनुसार, विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के विपरीत मानी जा रही इस व्यवस्था के खिलाफ परिषद ने लंबे समय तक कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई लड़ी। इसके बाद केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने संशोधन करते हुए 1 अप्रैल 2026 से स्मार्ट प्रीपेड मोड की अनिवार्यता समाप्त कर दी।

इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में पुराने आदेश के आधार पर नए बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं।

परिषद ने इसे असंवैधानिक और उपभोक्ता विरोधी बताते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है।

परिषद के अध्यक्ष एवं सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन समाप्त हो चुकी अधिसूचना का हवाला देकर जनता को भ्रमित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री, जो पहले केंद्र सरकार में भी कार्य कर चुके हैं, इस मामले की गंभीरता को समझने में विफल दिखाई दे रहे हैं। यह व्यवस्था उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है और इससे जनता का आर्थिक शोषण हो रहा है।

परिषद ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

खबरें और भी हैं

Latest News

Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.