नमाज को लेकर पति ने मांगा तलाक, शरई अदालत ने दिया सोचने का समय

कानपुर। कानपुर में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के अधिक समय तक नमाज पढ़ने और आपसी संवाद की कमी का हवाला देते हुए शरई अदालत में तलाक की गुहार लगाई, जिस पर शहरकाजी ने दोनों पक्षों को समझाते हुए जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी।

यह मामला मदरसा इशाअतुल, कुलीबाजार में शहरकाजी मौलाना Hafiz Abdul Quddus Hadi की अध्यक्षता में लगी शरई अदालत में सामने आया।

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शरई अदालत में बाबूपुरवा निवासी एक व्यक्ति (बदला हुआ नाम मोहम्मद निजाम) अपनी पत्नी के साथ पहुंचे। पति ने कहा कि वह दिनभर मेहनत-मजदूरी के बाद जब रात में घर लौटते हैं, तो उनकी पत्नी उनसे बात करने के बजाय नमाज पढ़ने लगती हैं और देर रात तक इबादत में लगी रहती हैं। उन्होंने इसे रोज की स्थिति बताते हुए तलाक दिलाने की मांग की।

इस पर शहरकाजी ने पत्नी से पक्ष जानना चाहा। पत्नी ने कहा कि उनके पति का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है और वह मारपीट तथा गाली-गलौज करते हैं। उन्होंने कहा कि वह नमाज में परिवार के लिए दुआ करती हैं, लेकिन पति का रवैया उचित नहीं है और बच्चों के सामने भी दुर्व्यवहार होता है।

मामले की सुनवाई के दौरान शहरकाजी ने कहा कि वैवाहिक जीवन में नमाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों दोनों का संतुलन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी दोनों को एक-दूसरे का ख्याल रखना चाहिए।

शहरकाजी ने दोनों को 15 दिन का समय देते हुए कहा कि वे अपने रिश्ते पर पुनर्विचार करें और जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। उन्होंने आपसी समझ और रिश्तों को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

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