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गोरखपुर में पत्नी के बाद बेटे की मौत से बिखर गया परिवार, ब्रह्मभोज के दिन उठी जवान बेटे की अर्थी
गोरखपुर। गोरखपुर के एक गांव में मंगलवार को ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। पत्नी की मौत के महज कुछ दिनों बाद बेटे को खोने का दुख एक पिता के लिए असहनीय साबित हो रहा है। घर के बाहर चारपाई पर बैठे कोमल शर्मा की हालत देखकर गांव के लोगों की भी आंखें भर आईं।
24 मई को पत्नी की हुई थी मौत
ग्रामीणों के अनुसार, 24 मई को कोमल शर्मा की पत्नी सावित्री देवी का निधन हो गया था। पत्नी की मौत के बाद वह पहले ही गहरे सदमे में थे। गांव के लोगों का कहना है कि उस घटना के बाद वह काफी शांत और गुमसुम रहने लगे थे।
ऐसे कठिन समय में उनका सबसे छोटा बेटा शुभम ही उनका सबसे बड़ा सहारा बना हुआ था। शुभम न केवल पिता की देखभाल करता था, बल्कि उनकी दवाइयों, खेती-बाड़ी और जमीन से जुड़े कामों की जिम्मेदारी भी संभाल रहा था।
ब्रह्मभोज के दिन ही छिन गया सहारा
परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि पत्नी की मौत के बाद कोमल शर्मा का एकमात्र सहारा शुभम ही था। लेकिन मंगलवार को किस्मत ने उनसे वह सहारा भी छीन लिया। जिस दिन परिवार दिवंगत सावित्री देवी का ब्रह्मभोज कर रहा था, उसी दिन शुभम की मौत ने पूरे परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया।
गांव में पसरा मातम
घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है। पुलिस की मौजूदगी में गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग दूर खड़े होकर घटनास्थल की ओर देखते रहे। हर किसी के चेहरे पर दर्द और स्तब्धता साफ नजर आ रही थी।
मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में भी भावुक दृश्य देखने को मिला। पोस्टमार्टम के लिए शुभम का शव पहुंचते ही रिश्तेदारों और परिचितों की भीड़ जुट गई। कोई उसकी कम उम्र को याद कर रो पड़ा, तो कोई उसकी होने वाली शादी और भविष्य की योजनाओं का जिक्र कर सिसक उठा।
ग्रामीणों के बीच एक ही बात बार-बार सुनाई दे रही थी—"माई के ब्रह्मभोज में बेटवा चल गइल... ई दिन भगवान दुश्मन के भी न देखावें।"
यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और हर कोई इस परिवार पर आए दुखों के पहाड़ को देखकर भावुक है।
